बोलचाल के भोजपुरी
Migration & family careबोलचाल के भोजपुरी

विदेश में नौकरी के मौका बा, बाकिर बूढ़ होत माई-बाबूजी के छोड़ल मुश्किल लागत बा?

प्यार के अपराध-बोध आ सपना के गद्दारी बनवले बिना, पहिले देखभाल के ठोस नक्शा बनाईं, फेर हाँ भा ना कहीं।

2026-11-06 7 min · 1,664 words

Direct answer

विदेश जाए भा ना जाए के फैसला भावना से ना, देखभाल के नक्शा से करीं। कागज पर लिखीं कि माई-बाबूजी के रोज, हर महीना आ अचानक का-का जरूरत पड़ेला, आ रउआ बाहर रहब त हर काम के के सँभारी। company से छुट्टी आ emergency travel के नियम लिखित में लीं। नक्शा में खाली जगह भर सकेला त जाइल गद्दारी ना ह; ना भर सके त रुकल कमजोरी ना ह।

टोकन नंबर 47 आ एगो email

आरा सदर अस्पताल के आँख वाला OPD के बाहर लकड़ी के बेंच पर प्रीतम अपना बाबूजी के बगल में बइठल रहलें। हाथ में पर्ची, टोकन नंबर 47, आ दीवार के बोर्ड पर अबहीं 31 चलत रहे। बाबूजी के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के तारीख आजे तय होखे के रहे। तबे जेब में फोन काँपल। दोहा के एगो construction company के email रहे: site engineer के offer, दू साल के contract, अगिला महीना के आखिरी हफ्ता में जॉइनिंग। प्रीतम फोन उलटा के घुटना पर राख दिहलें। बाबूजी पूछलें, “के ह रे?” प्रीतम कहलें, “company के mail ह, बाद में देखब।” ओह घड़ी उनका लागल कि ऊ दू गो आदमी बाड़ें: एगो जे बेंच पर बइठल बा, आ एगो जे पहिलहीं हवाई जहाज में बइठ गइल बा।

प्यार आ सपना एक-दोसरा के दुश्मन ना ह

प्रीतम के माई के BP के दवाई चलेला, बाबूजी के घुटना जवाब देवे लागल बा, आ छोट बहिन के बियाह छपरा में भइल बा, जे हर हफ्ता ना आ सकेली। टोला-मोहल्ला में केहू कहेला, “कमाए के उमिर इहे बा, चल जा।” केहू कहेला, “माई-बाप के छोड़ के कवन कमाई?” दुनो बात में आधा साँच बा, आ दुनो आधा अपराध-बोध पैदा करेला। एह लेख के सवाल ई नइखे कि रउआ अच्छा बेटा भा बेटी बानी कि ना। सवाल ई बा कि रउआ बाहर रहब त माई-बाबूजी के जरूरत के बेरा के पहुँची, आ ऊ इंतजाम सचमुच बन सकेला कि ना। एकर जवाब मन के उलझन से ना, कागज पर लिखल नक्शा से निकलेला।

देखभाल के नक्शा: पहिले ई टेबल भरीं

एगो कागज लीं आ भाई-बहिन के साथे बइठ के, भा फोन पर, हर जरूरत के सामने लिखीं कि आज ओकरा के सँभारत बा आ रउआ ना रहब त के। जहाँ जवाब “पता ना” आवे, असली काम उहे बा। नीचे प्रीतम के घर के टेबल बा; राउर घर के खाना अलग होई।

जरूरतअबहीं के करत बारउआ बाहर रहब तbackup
रोज के दवाई आ BP-sugar जाँचमाई खुदे, प्रीतम याद दियावेलेंहफ्ता के खाना वाला दवाई के डिब्बा आ फोन पर reminderपड़ोस के भउजी, भा chemist के घर पहुँचावे वाला सेवा
डॉक्टर के तारीख आ ऑपरेशनप्रीतम साथे जालेंबहिन, भा भरोसा वाला चचेरा भाईपहिले से बात कइल attendant
बैंक, पेंशन, बिजली के बिलप्रीतमonline auto-pay आ nominee के कागज पूरामोहल्ला के भरोसा वाला दोस्त
आधी रात के emergencyप्रीतम दस मिनट में पहुँचेलेंनजदीक के अस्पताल आ ambulance के नंबर दीवार परदू गो पड़ोसी, जेकरा लगे घर के चाभी बा
अकेलापन आ बतकहीप्रीतम रोज साँझ केतय दिन आ तय समय पर video callमंदिर के संगत आ नाती-नतिनी से बात

खाली खाना गिनीं, बहाना मत बनाईं

टेबल भर गइला पर देखीं कि कतना खाना में “केहू ना” भा “देखल जाई” लिखल बा। एक-दू जगह बा, त ऊ जाए से पहिले भरल जा सकेला: पड़ोसी से साफ बात, एगो attendant के नंबर, नजदीक के clinic के डॉक्टर से पहचान। आधा टेबल खाली बा, त अबहीं हाँ कहल माई-बाबूजी के भगवान भरोसे छोड़ल होई, आ ई बात बाद में रउआ के भीतर से खाई। एगो आउर बात: सब भार बहिन पर डाल के निकल गइल भी नक्शा ना ह। उनकर आपन घर, नौकरी आ ससुराल बा। उनका से पूछीं कि ऊ सचमुच का सँभार सकेली, मान के मत चलीं।

offer पर हाँ कहे से पहिले company से ई पूछीं

  • साल में कतना दिन के छुट्टी मिली, आ पहिला छुट्टी कब से ले सकेलीं।
  • घर में emergency भइला पर तुरंत छुट्टी के नियम का बा, आ टिकट के खर्चा के उठाई।
  • contract बीच में छोड़े के पड़े त कवनो जुर्माना भा notice period बा कि ना।
  • जॉइनिंग के तारीख एक-दू महीना आगे खिसक सकेला कि ना, ताकि ऑपरेशन के बाद के देखभाल हो जाव।
  • visa, work permit आ परिवार के बोलावे के नियम HR से लिखित में लीं; शक होखे त मान्य immigration सलाहकार से जँचवाईं, सुनल-सुनावल बात पर मत चलीं।

माई-बाबूजी से बात, फैसला सुनावे से पहिले

बहुत लोग पहिले टिकट कटा लेला, फेर घर में खबर देला, आ ओहिजे भरोसा में दरार पड़ जाला। बात अइसे शुरू करीं: “बाबूजी, माई, एगो offer आइल बा। हम अबहीं हाँ नइखीं कहले। पहिले रउआ दुनो से जाने के बा कि रउआ के सबसे जादा कवना बात के डर लागेला।” फेर चुप रह के सुनीं। कई बेर माई-बाप “जा बबुआ, हमनी ठीक बानी” कह के मन के डर दबा लेलन। कई बेर “मत जा” के पीछे कवनो खास डर होला, जइसे रात में तबियत बिगड़ी त अस्पताल के ले जाई। डर के नाम मिल गइल त ओकर इंतजाम हो सकेला। “हमनी के अकेले छोड़ देब” के कवनो दवाई ना होला, बाकिर “रात में अस्पताल के ले जाई” के जवाब खोजल जा सकेला।

दूर रह के भी पास कइसे रहीं

  • हफ्ता में दू दिन तय समय पर video call, ताकि माई-बाबूजी के इंतजार के आदत बने, चिंता के ना।
  • दवाई आ डॉक्टर के तारीख के एगो साझा calendar, जवना के बहिन आ रउआ दुनो देख सकीं।
  • माई-बाबूजी खातिर एगो अलग emergency fund, जेसे अचानक खर्चा पर केहू के आगे हाथ ना पसारे के पड़े।
  • बैंक, जमीन आ कागजात के अधिकार वाला काम वकील भा बैंक से पूछ के जाए से पहिले पूरा करीं।
  • साल में कम से कम एक बेर घर आवे के योजना, पहिलहीं से छुट्टी में गिनल।

कब रुकल भी सही फैसला बा

माई भा बाबूजी के कवनो बड़ बीमारी के इलाज अबहीं चलत बा, भा घर में दोसर कवनो भरोसा वाला आदमी नइखे, त “अबहीं ना” कहल कमजोरी ना ह। company से जॉइनिंग आगे बढ़ावे के बात करीं, भारत में अइसन काम खोजीं जवना में बीच-बीच में बाहर जाए के मौका होखे, भा दू साल के जगह एक साल के contract माँग के देखीं। रुकल भी एगो फैसला ह, आ जाइल भी। गलत बस ऊ ह जवन आधा मन से, बिना नक्शा के, केहू के ताना सुन के लिहल जाव।

कुंडली एह फैसला में का जोड़ सकेला

फैसला के बोझ ग्रह पर डाले के जरूरत नइखे। बाकिर जे लोग आपन कुंडली देखेला, ऊ ई समझ सकेला कि अबहीं कवन महादशा आ अंतर्दशा चलत बा, आ परंपरा में ओह ग्रह के जिनगी के कवना हिस्सा से जोड़ल जाला। बारहवाँ भाव दूर देश आ खर्चा से, चउथा भाव घर आ माई से जोड़ल जाला। ई सब सोचे के दिशा देला, टिकट के तारीख भा visa के गारंटी ना। जनम के तारीख, समय आ जगह से मुफ्त कुंडली बना सकेलीं, आ करियर आ ज्योतिष वाला पन्ना पर एकर तरीका देख सकेलीं। Astro Ratan एगो AI वैदिक ज्योतिषी ह, जवन WhatsApp पर राउर सटीक कुंडली पढ़ के राउर आपन सवाल के जवाब देला। माई-बाबूजी के कुंडली देखे के मन बा त पहिले उनका से पूछ लीं; उनकर हामी बिना उनकर कुंडली मत खोलीं।

देखभाल के मतलब हमेशा बगल में बइठल ना होला। मतलब ई बा कि जरूरत के घड़ी केहू ना केहू पहुँचे, आ ओकर नाम पहिलहीं से लिखल होखे।

एह हफ्ता के एगो काम

आज साँझ बहिन के फोन करीं आ ऊपर वाला टेबल साथे भरीं। काल्ह company के HR के ऊपर के सवाल लिख के भेजीं। दुनो के जवाब आ गइला के बादे हाँ भा ना पर सोचीं। एह बीच कवनो app डेरवावे वाला message भेजे कि “विदेश यात्रा में बाधा बा”, त आपन फैसला ओह एक line पर मत टाँगीं; अइसन alert के असली मतलब पहिले समझ लीं। प्रीतम के कहानी में ऑपरेशन के तारीख आ जॉइनिंग के तारीख के बीच तीन हफ्ता के फरक निकलल, आ ओही तीन हफ्ता में टेबल के खाली खाना भरल गइल।

Key takeaways

  • हाँ भा ना कहे से पहिले माई-बाबूजी के हर जरूरत आ ओकर backup कागज पर लिखीं।
  • company से छुट्टी, emergency travel आ contract तोड़े के नियम लिखित में माँगीं।
  • माई-बाबूजी के गोल-मोल डर के पीछे छुपल खास डर पूछीं, काहे कि इंतजाम ओही के होला।
  • सब भार भाई-बहिन पर डाल के निकल गइल नक्शा ना ह; पूछीं कि ऊ सचमुच का सँभार सकेलन।
  • रुकल भी फैसला ह; गलत खाली ऊ ह जवन बिना नक्शा के आधा मन से लिहल जाव।

जेकरा हाथ में offer letter बा आ मन में माई-बाबूजी के चिंता, ओकरा खातिर देखभाल के साफ नक्शा बनावे के तरीका।

आपन जनम के विवरण के साथे पूछीं कि रउआ के चलत दशा में घर आ करियर के बिषय कइसे उभरत बा, फैसला राउर हाथ में रही।

FAQ

बहिन भा भाई पहिले से माई-बाबूजी के लगे रहेलन, त का हमार जिम्मेदारी कम हो जाला?

जिम्मेदारी कम ना होला, बस ओकर रूप बदलेला। जे लगे बा ऊ समय आ मेहनत देत बा; जे बाहर बा ऊ पइसा, कागजी काम आ नियमित बातचीत से हाथ बँटा सकेला। एक बेर बइठ के साफ बाँट लीं कि के का करी, ना त लगे रहे वाला के मन में धीरे-धीरे खीस जमा होखे लागेला।

माई-बाबूजी साफ कहत बानी कि मत जा, तब का करीं?

पहिले पूछीं कि सबसे बड़ डर का बा: बीमारी, अकेलापन, भा लोग का कहिहें। जवन डर के ठोस इंतजाम हो सकेला, ऊ करके देखाईं। तबो मना करस, त ई बड़-बुजुर्ग आ बालिग संतान के बीच के बात ह; आखिरी फैसला रउए के लेवे के बा, बाकिर उनकर डर के मजाक मत बनाईं।

खाली पइसा भेज दिहला से माई-बाबूजी के देखभाल हो जाला?

पइसा से दवाई, attendant आ इलाज के इंतजाम होला, अकेलापन के ना। बहुत बुजुर्ग लोग के खर्चा से जादा चिंता ई होला कि बतियावे वाला केहू नइखे। तय समय पर फोन, छोट-छोट बात में उनकर राय माँगल आ साल में घर आइल, ई सब पइसा जेतने जरूरी बा।

का कुंडली बता सकेला कि हम विदेश में बस जाइब कि ना?

कुंडली से ई देखल जा सकेला कि कवन दशा चलत बा आ ओह दौर में दूर देश, घर आ करियर के बिषय कइसे उभरत बा। बाकिर कवनो ज्योतिष visa, नौकरी भा बसे के पक्का तारीख ना दे सकेला। ई सोचे में मदद करेला; फैसला आ मेहनत राउर रहेला।