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Generosity & financial safetyछत्तीसगढ़ी

अपन बर आड़े-बखत के पइसा जोरंव, कि रिस्तेदार के अभी मदद करंव?

मया ले मदद करव, फेर हिसाब ले; अइसन रकम तय करे के तरीका जेकर ले रिस्तेदार के संकट घटय अउ आपके घर मं दूसर संकट झन आवय।

2026-11-09 7 min · 1,546 words

Direct answer

पहिली अपन जरूरी महीना के खरचा जोड़व: किराया, खाना, दवई, EMI। ओतका रकम आड़े-बखत बर अलग मानव अउ ओला झन छुवव। ओकर ऊपर जेन बचथे, ओही आपके मदद के सीमा आय, अउ ओला उपहार मान के देवव, उधार नइ। बाकी मदद पइसा के बिना करव: संग जाना, बात करना, दूसर रस्ता खोजना। पूरा मांग पूरा नइ कर सकव, त साफ कहव कि कतका दे सकथव।

मुंगेली, रतिहा दस बजे के फोन

दिनेश बघेल उनतीस बछर के हे, मुंगेली मं बीज-खाद के एक दुकान मं मुनीम। एक कुरिया किराया मं लेय हे, अउ हर महीना दाई-ददा ल गांव पइसा भेजथे। ओ रतिहा दस बजे मौसी के बेटा संतोष के फोन आइस। संतोष के किराना दुकान बर समूह वाला करजा के किस्त तीन महीना ले रुके हे, अउ ओ दिन वसूली वाला मन घर तक आ गे रहिन। पाछू ले मौसी के रोवासी सुनात रहिस। संतोष कहिस, “भाई, दू दिन मं चालीस हजार चाही, नइ त गांव मं मुँह देखाय लाइक नइ रहिबो।” दिनेश ह फोन रखे बिना बैंक के ऐप खोलिस। खाता मं अठारह हजार दू सौ चालीस रुपिया रहिस, ओकर पूरा जिनगी के बचत।

मदद के मन, अउ ओकर पाछू के डर

दिनेश के मन मं दू आवाज एक संग रहिन। एक कहत रहिस कि संतोष बचपन के संगवारी आय, मौसी ह ओला अपन बेटा जइसे पाले हे, अउ आज मदद नइ करबे त काली कोन मुँह ले ओ घर जाबे। ये आवाज रिस्ता, इज्जत अउ दिनेश के अपन ये भरोसा ल बचाथे कि ओ बने मनखे आय। दूसर आवाज कहत रहिस कि अठारह हजार दे देबे त अगला महीना किराया अउ मोटरसाइकिल के किस्त कहाँ ले भरबे, अउ कहूँ ददा बीमार परिस त का करबे। ये आवाज दिनेश के अपन घर ल दूसर संकट ले बचाथे। दूनों आवाज सही हें। जेन बात अभी तक गायब रहिस, ओ ये कि संतोष तिर अउ का-का रस्ता हे, अउ दिनेश असल मं कतका दे सकथे।

पहिली अपन महीना के नाप

दिनेश के जरूरी खरचामहीना के रुपिया
कुरिया के किराया3,500
खाना-राशन4,000
गांव दाई-ददा ल5,000
मोटरसाइकिल के किस्त2,800
दवई, फोन, बिजली1,200
जोड़16,500

मदद के सीमा के सीधा हिसाब

दिनेश के तनखा इक्कीस हजार हे। जरूरी खरचा सोलह हजार पांच सौ। ओ ह तय करिस कि एक महीना के जरूरी खरचा, यानी सोलह हजार पांच सौ, ओकर ‘झन छुवव’ वाला रकम आय। खाता के अठारह हजार दू सौ चालीस मं ले ओला घटाइस त एक हजार सात सौ चालीस बचिस। ये महीना तनखा ले खरचा के बाद चार हजार पांच सौ बचथे; ओमा ले पांच सौ अपन बर राख के चार हजार। मतलब अभी के मदद के सीमा लगभग पांच हजार सात सौ चालीस रुपिया, बिना किराया, दवई, किस्त अउ ‘झन छुवव’ रकम ल छुवे। कहूँ संकट चलत रहय, त अगला दू महीना दू-दू हजार अउ। ये संतोष के मांग के चौथाई ले कम हे, अउ ये सुन के दिनेश ल लाज लगिस। फेर ये ओकर ईमानदार हिसाब रहिस। आपके खरचा अउ आंकड़ा अलग होहीं; तरीका एके रहिही।

उधार नइ, उपहार मान के देवव

रिस्तेदार ल देय पइसा अक्सर लहुटय नइ, अउ जब नइ लहुटय त हर तिहार, हर बिहाव मं ओ बात बीच मं खड़े रहिथे। एकरे सेती ओतके देवव जतका ल आप मन ले छोड़ सकव। कहूँ ओ लौटा देथे, बने बात; नइ लौटाथे, त रिस्ता ओ पइसा बर नइ टूटय। कोनो ल मदद करे बर खुद क्रेडिट कार्ड ले पइसा निकालना, पर्सनल लोन लेना या गहना गिरवी रखना सबले खतरनाक रस्ता आय: ओकर संकट घटय कि नइ, आपके ऊपर बियाज के एक नवा संकट पक्का चढ़ जाथे। कहूँ बड़े रकम उधार देनच हे, त लौटाय के तारीख अउ किस्त कागज मं लिख लेवव, बिना झिझक; साफ कागज रिस्ता ल बचाथे।

पइसा के बिना जेन मदद हो सकथे

  • संग जाके करजा देवइया समूह या बैंक ले किस्त आगू बढ़ाय या छोटे किस्त मं बांटे के बात करव; अकेल्ला डरे मनखे के बात अक्सर नइ सुने जाय।
  • परिवार के दू-तीन अउ घर ले गोठ करके रकम बांटव, ताकि पूरा बोझा एक झन ऊपर झन आवय।
  • दुकान के कोन माल बेचे जा सकथे, कोन खरचा रुक सकथे, एकर सूची बनाय मं मदद करव।
  • वसूली वाला मन धमकी देवत हें या गारी देथें, त ओकर बात लिख लेवव; करजा देवइया ल घलो नियम ले चलना परथे, अउ धमकी मिलय त पुलिस के 112 हे।
  • संतोष के संग बइठ के आगू के महीना के हिसाब बनावव, ताकि अगला किस्त फेर रतिहा के फोन झन बनय।

‘ना’ के जगा ‘अतका’

दिनेश ह दूसर दिन बिहनिया फोन करिस, रतिहा के घबराहट मं नइ। ओ ह कहिस: “संतोस, मोर तिर चालीस हजार नइ हे, अउ मैं तोर ले झूठ नइ बोलंव। अभी पांच हजार सात सौ भेजत हंव, एला लौटाय के फिकर झन करबे। अउ काली मैं छुट्टी लेके तोर संग समूह वाला दफ्तर चलहूँ।” ये बात मं तीन चीज हे: साफ सीमा, बिना सरत के रकम, अउ संग खड़े होय के वादा। ‘देखथंव’, ‘कोसिस करहूँ’ जइसे गोल-मोल जवाब ले सामने वाला आस मं अटके रहिथे अउ बाद मं जादा दुख होथे। अउ जेन मदद करेव, ओकर गोठ परिवार मं झन फइलावव; मदद पाय वाला के इज्जत घलो ओतके कीमती आय।

जेन मदद मोला अगला महीना खुद उधार मांगे बर मजबूर कर देय, ओ मदद नइ, दू ठन संकट आय।

जब घर ले आवाज आथे ‘अपने खून आय’

अइसन बेरा मं अक्सर दाई या कोनो सियान के फोन आथे: अपन भाई आय, कइसे मना करबे। ओ दबाव के पाछू मया अउ समाज के डर दूनों होथे। ओमन ल अपन हिसाब देखावव, बिना सफाई दिये: मोर एक महीना के खरचा अतका हे, अतका अलग रखना जरूरी हे, अउ ओकर ऊपर के सबो मैं दे देंव। अक्सर सियान मन ल पता नइ रहय कि आपके तनखा ले का-का जाथे। कहूँ तभो दबाव नइ घटय, त याद राखव कि कहूँ आपके ऊपर संकट आही त इही हिसाब ओ बेरा ओमन ल घलो बचाही।

ग्रह-दसा अउ पइसा के फैसला

कतको मनखे पूछथें कि मोर महादशा मं पइसा देना ठीक हे कि नइ, या कोन दिन देना सुभ होही। कोनो ग्रह या दसा ये नइ बतावय कि उधार देवव कि नइ, अउ पइसा के फैसला ल ग्रह के बेरा ले तय करना ठीक नोहय; ओ फैसला आपके खरचा अउ बचत के हिसाब ले होथे। जोतिस अइसन बेरा मं अपन मन के बेचैनी ल समझे मं मदद कर सकथे। Astro Ratan एक AI वैदिक जोतिसी आय, जेन आपके सही कुंडली ले गोठियाथे अउ पइसा के सलाह कभू ग्रह ऊपर नइ टिकाय; एकर सदस्यता कइसे चलथे, ओ सदस्यता के पन्ना मं हे। घर मं तनखा के हिसाब अउ काबू ऊपर तनाव हे, त दाई-ददा अउ तनखा के हिसाब वाला लेख घलो पढ़व।

दिनेश के ‘झन छुवव’ खाता

समूह वाला दफ्तर मं दिनेश अउ संतोष दूनों गिन, त रुके किस्त ल छै महीना मं बांटे के बात बन गे। बाकी पइसा संतोष के ससुराल वाला मन जोरिन। दिनेश ह अपन पांच हजार सात सौ वापस नइ मांगिस। ओ महीना ओ ह बैंक मं एक अलग खाता खोलिस अउ ओकर नाम अपन कापी मं ‘झन छुवव’ लिखिस। हर तनखा के दिन ओमा पांच सौ रुपिया जाथे। ओकर लक्ष्य हे कि धीरे-धीरे तीन महीना के जरूरी खरचा ओमा जुर जाय। अगला बेर कोनो रतिहा दस बजे फोन करही, त दिनेश तिर घबराहट नइ, एक हिसाब रहिही।

Key takeaways

  • एक महीना के जरूरी खरचा ल ‘झन छुवव’ वाला रकम मानव; मदद ओकर ऊपर के पइसा ले होही, भीतर ले नइ।
  • जतका देवत हव, ओला उपहार मान के देवव; लौटही त बोनस, नइ लौटही त रिस्ता नइ टूटय।
  • मदद बर खुद करजा, क्रेडिट कार्ड या गहना गिरवी झन रखव; एक संकट ल दू मं बदले के ये सबले जल्दी रस्ता आय।
  • ‘ना’ के जगा ‘अतका दे सकथंव, अउ ये काम मं संग चलहूँ’ कहव; आधा मदद साफ कहे ले इज्जत दूनों के बचथे।

जेन संगवारी रिस्तेदार के फोन आते साथ अपन पूरा बचत दे देथे, ओला ये ‘झन छुवव’ वाला हिसाब दिखावव।

पइसा के फैसला मं मन भारी हे अउ अपन कुंडली संग बात करना हे? Astro Ratan ले पूछव; हिसाब आपके रहिही, सुभ-असुभ के दबाव नइ।

FAQ

मोर तिर आड़े-बखत के पइसा हे ही नइ; तब कोनो मांगय त का करंव?

तब पइसा के मदद के सीमा लगभग सुन्ना आय, अउ ये कहना सच बोलना आय, कंजूसी नइ। समे, संग जाना अउ दूसर रस्ता खोजे मं मदद देवव। ओही दिन ले अपन बर हर महीना नान्हे रकम अलग करे सुरू करव, चाहे पांच सौ ही होय।

पिछला बछर दे पइसा अभी तक नइ लौटे हे; फेर मांगत हे, का करंव?

पुराना उधार ल बिना रिस के सामने रखव: पिछला अभी बाकी हे, एकरे सेती अभी पइसा नइ दे सकंव। पइसा के जगा दूसर मदद देवव। पुराना रकम ल मन ले उपहार मान लेवव त आपके मन हल्का होही, फेर नवा उधार बर ओ बात ल भुलाय के जरूरत नइ।

रकम दे देंव त ओला कागज मं लिखवाय मं बुरा लगथे; बिना लिखे चल जाही?

कहूँ रकम उपहार आय, त कागज के जरूरत नइ। फेर कहूँ लौटे के उमीद हे, त तारीख अउ किस्त लिखना दूनों बर बने आय, काबर के बाद मं सुरता अलग-अलग होथे। कागज अविस्वास नइ, साफ-सफाई आय, अउ बाद के झगरा ले बचाथे।

हर दू-तीन महीना मं एके रिस्तेदार मांगथे; ये कब तक चलही?

बार-बार के मांग एक संकट नइ, एक ढर्रा आय, अउ ओकर इलाज पइसा नइ, गोठ आय। ओकर संग बइठ के पूछव कि हर महीना कमी काबर परत हे, अउ आगू के योजना का हे। बछर भर मं ओला कतका दे सकथव, ओ सीमा पहिली ले तय करव अउ ओला बता देवव।