साथी अकेल्ला मं तारीफ करथे, फेर ओकर घरवाले तोर काम ल टाइमपास मानथें—का सिरिफ मया काफी हे?
बंद कुरिया के तारीफ तब अधूरा पर जाथे जब भरी परछी मं तोर मेहनत के मजाक उड़य अउ साथी चुपचाप मोबाइल देखत रहि जाय।
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जब आपका जीवनसाथी या मंगेतर अकेल्ला मं आपके काम के सम्मान करथे फेर अपन परिवार के ताना के आगू चुप रहि जाथे, त असली सवाल मया के नइ बल्कि पारिवारिक व्यवस्था मं सुरक्षा के होथे। सिरिफ बाद मं कार मं बइठके सहानुभूति जताना काफी नोहय; जरूरी ये हे कि साथी सबके बीच शांत अउ साफ शब्द मं आपके काम के मोल ल स्थापित करय।
मनेन्द्रगढ़ के परछी, पंगत के बाद के हंसी अउ कार के सन्नाटा
मृणालिनी महंत अट्ठाईस बछर के हे, बैकुंठपुर मं रहिके सरगुजा अउ कोरिया कोती के बुनकर अउ बांस-शिल्प कारीगर मन संग ऑनलाइन बुटीक अउ डिजाइन स्टूडियो चलाथे। ओकर काम ले चौदह कारीगर परिवार के चूल्हा जलथे अउ ओकर मासिक आमदनी कोनो प्रथम श्रेणी के अधिकारी ले कम नइ हे। ओकर मंगेतर सार्थक सरकारी महाविद्यालय मं सहायक प्राध्यापक हे। जब दूनों अकेल्ला मं कॉफी पीथें, त सार्थक बड़े गर्व ले कहिथे कि मृणालिनी के उद्यम अउ मेहनत कमाल के हे। फेर ओ इतवार मनेन्द्रगढ़ मं सार्थक के बड़का ददा के घर पारिवारिक भोज रहिस। जेवन के बाद जब पच्चीस झन परछी मं बइठे रहिन, त सार्थक के मझला काका ह सुपाड़ी कातत हंस के कहिस, “अरे मोबाइल मं कपड़ा-डलिया के फोटो डालना त लइका मन के टाइमपास आय; बिहाव के बाद जब रंधनी अउ पहुना संभालबे त ये सब शौक अपने-आप छूट जाही, असली नौकरी त हमर सार्थक के सरकारी कुर्सी आय।” परछी मं ठहाका गूंज गे। मृणालिनी ह सार्थक कोती देखिस—सार्थक ह झेंप के मुस्काइस अउ अपन फोन के स्क्रीन स्क्रॉल करे लगिस। लहुटत बेरा कार मं सार्थक ह मृणालिनी के हाथ धरके कहिस, “ओमन पुरान सोच के लोगन अंय, तैं मन मं झन ले, मैं त जानथंव न तोर काम कतका बड़े हे।”
बंद कुरिया के हमदर्दी परछी के अपमान ल काबर नइ धो पावय?
मृणालिनी ल सार्थक के मया ऊपर संका नइ रहिस, फेर कार के ओ मीठ बात ले ओकर मन के कसक कम नइ होइस। काबर? काबर कि हमर समाज मं बिहाव सिरिफ दू झन के बीच कॉफी टेबल मं नइ होवय; बिहाव पूरा पारिवारिक तंत्र के बीच निभथे। जब परिवार के लोगन कोनो के पेशेवर मेहनत ल ‘टाइमपास’ या ‘मन बहलाव’ कहिथें, त ओ ह सिरिफ एक ठन मजाक नइ होवय। ओ ह भविष्य के एक अघोषित नियम होथे—कि कहूँ काल्ह घर मं पहुना आहीं, त सार्थक अपन कॉलेज जाही फेर मृणालिनी ल अपन ग्राहक के मीटिंग रद्द करके पकौड़ी तले बर परही, काबर कि ओकर काम त ‘शौक’ गिने गे हे। जब साथी ओ बेरा चुप रहिथे, त पूरा परिवार ओकर चुप्पी ल सहमति मान लेथे।
निजी मया बनाम पारिवारिक तंत्र मं सम्मान: दूनों के कीमत
इहां फैसला के केंद्र मं दू बात आमने-सामने खड़े हे: ‘निजी मया’ अउ ‘पारिवारिक व्यवस्था मं सम्मान’। कहूँ आप सिरिफ निजी मया ल देखके परिवार के ताना ल हर बेर पी जाथव, त आज के माहौल तो शांत रहिथे अउ सार्थक ल अपन काका-ददा के आगू असहज नइ होना परय। फेर एकर कीमत धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास, आपका काम के समय अउ अंत मं आपके सार्थक के प्रति आदर चुकाथे, काबर कि जेन साथी भरी सभा मं आपके ढाल नइ बन सकय, ओकर निजी तारीफ खोखली लगे लगथे। दूसर कोती, कहूँ आप हर भोज मं खुद ही सियान मन ले लड़ जाथव, त आप ल तुरंत ‘तेज अउ झगड़ालू’ घोषित कर दे जाथे अउ साथी बीच मं फंस जाथे। इहां जेन सबूत गायब रहिथे, ओ ये आय कि का साथी सच मं अपन परिवार के आगू आपके काम के मर्यादा रखे के हिम्मत रखथे, या ओ ह सिरिफ शांति के नाम मं आप ल ही झुकाय के उम्मीद रखथे? जइसे रिस्ता मं ऑनलाइन सक्रिय रहे के बाद घलो सूखा जवाब मिले ले मन मं संका जागथे, वइसनेच परिवार के बीच साथी के चुप्पी भविष्य के असुरक्षा देखाथे।
साथी के असली साथ अउ खाली दिलासा मं फरक
| परिवार के बीच स्थिति | सिरिफ अकेल्ला मं साथ देवइया साथी | परिवार के बीच सम्मान बचइया साथी |
|---|---|---|
| काम ल ‘शौक’ या ‘छोटा’ कहे जाय मं | हंस के बात टाल देथे अउ बाद मं अकेल्ला मं कहिथे कि ‘ओमन के बात छोड़’ | उही बेरा आदर संग कहिथे—‘काका, मृणालिनी के काम ले चौदह परिवार चलथे, ये पूरा समय के गंभीर व्यवसाय आय’ |
| घर के काम अउ दफ्तर के समय टकराय मं | उम्मीद करथे कि आप ही अपन काम एडजस्ट कर लेहू ताकि घर मं किचकिच झन होवय | घर मं साफ बताथे कि जइसे मोर कॉलेज के समय तय हे, वइसनेच ओकर काम के घंटा घलो तय हे |
| तरक्की या कमाई के जिकर होय मं | सियान मन के अंहकार बचाय बर आपके सफलता ल छुपाथे या कम करके बताथे | परिवार के बीच स्वाभाविक गर्व ले आपके उपलब्धि के परिचय कराथे |
| सीमा तय करे के जिम्मेदारी | आप ल ही कहिथे कि ‘तैं खुद समझा लेबे’ | अपन माता-पिता अउ रिश्तेदार मन ले बात करे के जिम्मेदारी खुद उठाथे |
बड़ों ले बेअदबी करे बिना साथी बात कइसे रख सकथे?
अक्सर साथी डरथे कि कहूँ ओ ह काका या दाई के बात काटही, त घर मं महाभारत मच जाही। फेर सम्मान बचाय बर चिल्लाय के जरूरत नइ होवय। सियान मन के लिहाज करत हुए भी एकदम ठोस बात कहे जा सकथे। जब काका ह मृणालिनी के काम ल ‘टाइमपास’ कहिस, त सार्थक ह मुस्कावत पर पक्का आवाज मं एतका कहि सकत रहिस: ‘काका, आजकल जमाना बदल गे हे; मृणालिनी के स्टूडियो ले बस्तर अउ सरगुजा के कारीगर मन के माल दिल्ली-मुंबई जाथे, अउ टैक्स के हिसाब ले देखव त ओकर काम मोर नौकरी बरोबर ही मजबूत हे।’ जब बेटा या घर के लइका खुद आदर संग आंकड़ा अउ महत्व रखथे, त रिश्तेदार मन के सुर दस मिनट मं बदल जाथे। लोगन उही जगह मजाक उड़ाथें जिहां ओमन ल पता रहिथे कि कोनो रोके वाला नइ हे।
जेन मया बंद कमरा मं ताली बजावय अउ भरी परछी मं मौन साधे रहि जाय, ओ ह बिहाव के बाद धीरे-धीरे थकान बन जाथे।
एक जरूरी प्रयोग: ‘बाद मं नइ, ओही घड़ी’ के सवाल पूछव
अपन साथी के नीयत अउ हिम्मत ल परखे बर ए हफ्ता एक शांत अउ सीधा प्रयोग करव। जब आप दूनों शांत मूड मं बइठे होवव, त पिछला घटना के ताना मारे बिना एक सीधा सवाल पूछव: ‘अगली बेर जब परिवार के बैठक मं कोनो मोर काम ल टाइमपास या बेकार कहिही, या मोला दफ्तर के काम छोड़ के घरेलू काम मं लगे बर कहिही, त तैं कार मं आके नइ—बल्कि उही परछी मं सबके सामने का कहिबे?’ ओकर जवाब ल ध्यान ले सुनव। कहूँ ओ ह कहिथे कि ‘तैं छोटी बात ल बतंगड़ बनाथस’ या ‘सियान मन के आगू मुंह नइ खोलना चाही’, त समझ लेवव कि ओ ह अपन आराम खातिर आपके सम्मान के बलि चढ़ाय बर तैयार हे। अउ कहूँ ओ ह मानथे कि ओकर ले चूक होइस अउ आप दूनों मिलके एक शांत वाक्य तय करथव जेन ओ ह अगली बेर बोलही, त ओ रिस्ता मं सुधार के पूरा गुंजाइश हे।
परिवार के बीच अपन काम के मर्यादा स्थापित करे के चार उपाय
- अपन काम ल खुद गंभीरता ले बतावव: जब रिश्तेदार काम के बारे मं पूछयं, त संकोच मं ‘बस थोरकन काम कर लेथंव’ झन कहव; साफ शब्द मं अपन पद, काम के घंटा अउ जिम्मेदारी बतावव।
- साथी संग पहिली ले ‘समय-नियम’ तय करव: बिहाव या सगाई के बाद कोनो पारिवारिक कार्यक्रम मं जाय ले पहिली तय कर लेवव कि आपके काम के जरूरी कॉल या मीटिंग के बेरा साथी घर के काम संभालही।
- गैर-पारंपरिक काम ल नतीजा ले समझावव: फ्रीलांसिंग, डिजाइन या ऑनलाइन व्यापार ल सियान मन तब समझथें जब ओमन ल पता चलथे कि एमा नियमित अनुशासन, ग्राहक के अनुबंध अउ पक्का आमदनी हे।
- सम्मान ल समझौता के शर्त झन बनावव: घर के बड़ों के सेवा अउ आदर पूरा करव, फेर अपन आजीविका के अपमान ल ‘संस्कार’ के नाम मं मुड़ी झुका के स्वीकार मत करव।
वैदिक जोतिस मं सप्तम भाव, दशम भाव अउ सहजीवन के संतुलन
वैदिक जोतिस मं कुंडली के सातवां भाव जीवनसाथी अउ आपसी साझेदारी ल देखाथे, दसवां भाव खुद के कर्म अउ स्वाभिमान ल देखाथे, अउ दूसरा भाव कुटुंब तथा वाणी के संस्कार ल देखाथे। स्वस्थ सहजीवन उही आय जिहां सप्तम भाव के साथ दशम भाव के कर्म ल दबाए नइ, बल्कि ओला बल देवय। कई बेर बिहाव के चर्चा मं लोगन सिरिफ मांगलिक दोष के नाम ले डराथें, जबकि शास्त्र मं मंगल के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव मं स्थिति के कई शास्त्रीय परिहार बताय गे हें अउ ओ ह कभू डर या विवाह के रोक के कारण नइ होवय; असली मिलान आपसी आदर अउ व्यवहार के होथे। जइसे खराब राशिफल पढ़के अपन तय योजना रद्द कर देना उचित नोहय, वइसनेच परिवार के ताना के डर ले अपन हुनर छोड़ना ठीक नोहय। याद रखव कि साथी या ओकर परिवार के कुंडली ओमन के सहमति के बिना देखना मर्यादा के विरुद्ध आय। आप अपन जन्म-पत्री ल निःशुल्क कुंडली पन्ना या निःशुल्क मांगलिक जांच मं देख सकथव, अउ संबंध के समझ बर Astro Ratan के प्रेम अउ विवाह जोतिस पन्ना के मदद ले सकथव। Astro Ratan एक AI वैदिक जोतिसी आय जेन आपके सही डिग्री के चार्ट पढ़के छत्तीसगढ़ी समेत भारतीय भाखा मन मं मार्गदर्शन देथे।
बैकुंठपुर के कॉफी, सार्थक के वादा अउ अगली बैठक के बदलाव
मृणालिनी ह दूसर दिन बैकुंठपुर मं सार्थक ले साफ कहिस, “सार्थक, तोर अकेल्ला के तारीफ मोला बने लगथे, फेर जब मनेन्द्रगढ़ के परछी मं मोर पांच बछर के मेहनत के मजाक उड़त रहिस अउ तैं फोन देखत रहिस, त मोला लगिस कि बिहाव के बाद मैं उहां अकेल्ला पर जाहूँ।” सार्थक ह पहली बेर बात के गंभीरता ल समझिस। दू हफ्ता बाद जब सार्थक के ममा के घर मुंडन के नेवता रहिस अउ फेर उही काका ह पूछिस कि ‘डलिया-कपड़ा के खेल कइसे चलत हे?’, त सार्थक ह तुरंत बीच मं मुस्का के कहिस, “काका, खेल नोहय, ए महीना मृणालिनी के स्टूडियो ल राज्य हस्तशिल्प प्रदर्शनी ले बड़े ऑर्डर मिले हे, हमन सब ल ओकर काम ऊपर गर्व हे।” परछी मं सन्नाटा छा गे अउ फेर काकी ह खुद पूछिस कि कोसा के साड़ी कइसे मंगाथें। मृणालिनी ल ओ दिन भरोसा होइस कि ओकर साथी सिरिफ प्रेमी नोहय, जीवनसाथी बने बर तैयार हे।
Key takeaways
- अकेल्ला मं मिले तारीफ अउ परिवार के बीच मिले सम्मान दू अलग बात आय; लंबा वैवाहिक जीवन पूरे परिवार के माहौल मं चलथे।
- जब साथी के घरवाले आपके काम ल ‘शौक’ या ‘टाइमपास’ कहिथें, त आज के चुप्पी काल्ह काम छोड़े के दबाव बन जाथे।
- परिवार मं बगावत करे के जरूरत नइ हे, फेर साथी के मुंह ले शांत अउ पक्का समर्थन तुरंत ओही बेरा आना जरूरी हे।
- बिहाव या आगे के फैसला ले पहिली साथी ले तय करव कि जब काम अउ घरेलू उम्मीद टकराही, तब ओ ह सबके आगू का भूमिका निभाही।
जेन संगवारी के काम ल ससुराल या रिश्तेदारी मं ‘टाइमपास’ कहिके हंसे जाथे, ओला ये लेख जरूर भेजव।
अपन जन्म-कुंडली के सप्तम अउ दशम भाव के तालमेल अउ विवाह के समय समझना चाहथव? Astro Ratan मं अपन चार्ट देखव।
