छत्तीसगढ़ी
Balance & wellbeingछत्तीसगढ़ी

भविष्य के चिंता मं पाई-पाई जोड़त हव—का काल्ह ल सुरक्षित करत-करत आज जीना ही छोड़ दे हव?

आड़े वक्त बर पइसा बचाना समझदारी आय, फेर जब हर छोटे सुकून अउ जरूरत के खर्चा घलो अपराध लगे लगय, त समझ लेवव कि बचत ह सुरक्षा के बदला डर बन गे हे।

2026-11-09 9 min · 2,043 words

Direct answer

भविष्य बर अनुशासन ले बचत करना परिवार के सुरक्षा खातिर जरूरी हे, फेर जब आप अपन सेहत, जरूरी आराम अउ परिवार के छोटे-मोटे खुशी ल घलो फिजूलखर्ची मान के काट देथव, त जिनगी सिरिफ एक इंतजार बनके रहि जाथे। सही आर्थिक योजना उही आय जेमं आपातकालीन कोष अउ भविष्य के बचत के संग-संग आज के जीवन खातिर घलो एक तय, अपराध-मुक्त हिस्सा रखे जावय।

अकलतरा के स्टेशन रोड, सूता लपेटे चश्मा अउ कैंसिल होए सिरपुर के रस्ता

तीरथराम डड़सेना बत्तीस बछर के हे, अकलतरा के स्टेशन रोड तीर के एक बड़े थोक अनाज अउ बारदाना मंडी मं वरिष्ठ लेखाकार के काम करथे। ओकर हिसाब के पक्कापन के पूरा बजार मं नाम हे। तीरथराम के तीर खुद के पक्का मकान हे, कोनो करजा नइ हे, अउ बैंक मं तीन ठन सावधि जमा के संग अठारह महीना के घर खर्च बराबर आपातकालीन कोष जमा हवय। फेर ओकर नाक मं टंगे चश्मा के बायां डंडी पिछले चार महीना ले करिया धागा ले बंधाय हे। पिछला इतवार ओकर पत्नी गायत्री अउ सात बछर के बेटी तोषिनी ह कहिन कि चलव आज बस धर के सिरपुर के मंदिर अउ महानदी तीर घूम के आबो, संझा तक लहुट जाबो, कुल जमा पांच सौ रुपिया लगही। तीरथराम ह तुरंत कागज मं हिसाब जोड़िस—बस भाड़ा, चाट-गुपचुप, पानी बोतल—अउ ओकर चेहरा उतर गे। ओ ह कहिस, ‘अतका महंगाई के जमाना मं पांच सौ रुपिया हवा मं उड़ाना ठीक नइ हे गायत्री, आगू तोषिनी के बड़े पढ़ाई हे।’ तोषिनी चुपचाप अपन बस्ता कोना मं रख दिस, अउ तीरथराम ह पांच सौ रुपिया बचा त लिस, फेर पूरा इतवार अंगना के सन्नाटा ओला कांटा जइसन गड़त रहिस।

तिजोरी भरत जाथे फेर मन के डर कम काबर नइ होवय?

हमन मं ले बहुत झन ल लइकापन ले इही सिखाय जाथे कि ‘पइसा पेड़ मं नइ फरे’ अउ ‘आड़े वक्त कभू बताके नइ आवय’। जेन मनखे ह अपन घर मं तंगी देखे हे या खुद के मिहनत ले एक-एक रुपिया जोड़े हे, ओकर भितर भविष्य ल सुरक्षित करे के जबरदस्त जिम्मेदारी जाग जाथे। शुरू मं जब जमा-पूंजी कम रहिथे, तब हाथ दबाके चलना एकदम जरूरी अउ समझदारी के काम होथे। फेर दिक्कत तब शुरू होथे जब आर्थिक हालत सुधर जाय के बाद घलो दिमाग ह उही पुरान ‘अकाल मोड’ मं अटके रहि जाथे। अइसन मनखे ल हर खर्च—चाहे ओ अपन कमर दरद बर बने गद्दा लेना होवय, चाहे परिवार संग साल मं एक बेर बाहिर खाना होवय—भविष्य संग गद्दारी जइसन दिखथे। ओ ह सोचथे कि एक लाख अउ जुड़ जाही त चैन मिलही, फेर जब ओ लक्ष्य पूरा हो जाथे, त डर ह खिसक के अगला लक्ष्य मं जा बइठथे।

भविष्य के सुरक्षा बनाम आज के जीवंत जिनगी: दूनों के कीमत

इहां फैसला के तराजू मं दू ठन जरूरी बात आमने-सामने हवंय: एक कोती ‘भविष्य के सुरक्षा’ हे अउ दूसर कोती ‘आज के जीवंत जिनगी’ हे। भविष्य के सुरक्षा आप ल अचानक आए बीमारी, नौकरी के उतार-चढ़ाव अउ बुढ़ापा मं ककरो आगू हाथ फइलाय के मजबूरी ले बचाथे; ए ह मनखे ल आत्मसम्मान अउ निश्चिंतता देथे। फेर कहूँ आप सिरिफ इही एक पल्ला ल सब कुछ मान लेथव, त एकर कीमत आपके आज के सेहत, जीवनसाथी के संग के मिठास अउ लइका मन के लइकापन चुकाथे—क्योंकि तोषिनी ह दुबारा सात बछर के नइ होही। दूसर कोती, कहूँ कोनो मनखे सिरिफ ‘आज मं जियव’ कहिके बिना सोचे-समझे कमाई उड़ा देथे, त ओ ह कल के मुसीबत ल नेवता देथे। जइसे संगवारी ल उधार देय के बाद संबंध अउ पइसा दूनों के दुविधा मं सीमा तय करना परथे, वइसनेच अपन भविष्य के तिजोरी अउ आज के थारी के बीच घलो एक साफ सीमा चाही। इहां जेन सबूत गायब रहिथे, ओ ये आय कि का कुल कमाई के एक बहुत छोटे, गिनती के हिस्सा आज के सुख मं लगाय ले सच मं भविष्य के किला ढह जाथे?

स्वस्थ मितव्ययिता अउ डर-आधारित कंजूसी मं फरक

पहलूसंतुलित अउ समझदार बचतडर ले बंधाए आत्म-वंचना
बचत के तरीकामहीना के शुरू मं तय हिस्सा निवेश अउ आपात कोष मं जाथे, बांचे रकम बेझिझक उपयोग होथेहर छोटे खर्च के बाद मन मं अपराध-बोध उठथे अउ बांचे पइसा ल घलो छूए ले डर लगथे
सेहत अउ आरामचश्मा, जूता, दांत के जांच अउ पौष्टिक खाना ल जरूरी निवेश माने जाथेदेह के तकलीफ ल टाला जाथे ताकि कुछ सौ रुपिया बांच जाय
परिवार के अनुभवसाल-छै महीना मं बजट भितर छोटे यात्रा या तिहार के उछाह मन ल रिचार्ज करथेहर नेवता, पिकनिक अउ खुशी के मौका ल ‘फिजूलखर्ची’ कहिके रद्द कर दे जाथे
मन के अवस्थापइसा के ऊपर नियंत्रण के शांत भरोसा रहिथेपइसा बढ़े के बाद घलो हमेशा कंगाल हो जाय के काल्पनिक डर सतावत रहिथे

कागज मं ‘पर्याप्त’ के परिभाषा लिखव

तीरथराम ह ओ रतिहा अपन हिसाब के डायरी खोलिस अउ पहिली बेर ये नइ जोड़िस कि कतका खर्चा होइस, बल्कि ये देखिस कि ओकर तीर आज कतका सुरक्षा हे। ओ ह पाइस कि ओकर आपातकालीन कोष पूरा हे, बेटी के पढ़ाई के किस्त हर महीना अपने-आप कटत हे, अउ रिटायरमेंट खाता घलो नियम ले चलत हे। फेर ओकर डायरी मं ‘आज के जिनगी’ के नाम के कोनो खाना ही नइ रहिस! जब बजट मं सिरिफ ‘बचत’ अउ ‘मजबूरी के खर्च’ लिखे होथे, त दिमाग हर खुशी ल चोरी मान लेथे। ए गुत्थी ल सुलझाय के सबले सरल उपाय हे कि आप अपन डायरी मं साफ अंक मं लिखव कि हर महीना कतका रुपिया जुड़ गे माने आप ‘सुरक्षित’ हव। एक बेर ओ रकम अलग खांचे मं चले गे, त ओकर बाद बांचे पइसा मं ले एक छोटे हिस्सा आज के मुस्कान मं खर्च करना कोनो नियम तोड़ना नोहय, बल्कि नियम के पालन करना आय।

भविष्य के पेड़ ल सींचे बर आज के जड़ ल सुखा देना समझदारी नोहय; पइसा आपके जिनगी के सेवक आय, मालिक नइ।

तीस दिन के प्रयोग: ‘अपराध-मुक्त खुशी के लिफाफा’

आवइया महीना के तनखा या आमदनी आतेच एक छोटे व्यावहारिक प्रयोग करव। अपन नियमित बचत अउ घर के बंधाए खर्च ल अलग रखे के बाद, अपन कुल कमाई के सिरिफ तीन ले पांच प्रतिशत (या सुरुआत मं हजार-पंद्रह सौ रुपिया जतका आपके बजट मं सहज होवय) एक अलग खाता या नगद लिफाफा मं रखव। ए लिफाफा के नाम रखव ‘आज के उछाह कोष’। नियम ये हे कि ए रकम ल आप महीना खतम होय ले पहिली अपन या परिवार के कोनो अइसन छोटे सुख मं खर्च करहू जेन लंबा समय ले टलत आवत रहिस—जइसे अपन टूटे चश्मा बदलवाना, जीवनसाथी संग कोनो बने जगह खाना, कोनो किताब खरीदना या लइका मन ल तीर के मेला घुमाना। महीना के आखिरी दिन अपन बचत खाता देखव अउ खुद ले पूछव: का ए छोटे रकम खर्च करे ले मोर भविष्य के सुरक्षा एक इंच घलो डगमगाइस? जब आंख के सामने दिखही कि बचत ज्यों-के-त्यों मजबूत हे अउ घर मं हंसी घलो बढ़िस, त मन के जकड़न अपन आप ढीला पर जाही।

अभाव के घबराहट ल शांत करे के चार ठोस नियम

  • बचत ल स्वचालित करव: महीना के पहिली हफ्ता मं ही भविष्य के बचत अउ आपात कोष के रकम अलग हो जाने देवव, ताकि बाकी महीना हर सौ रुपिया ऊपर दिमाग मं पंचायत झन बइठय।
  • देह के रखरखाव ल खर्च झन मानव: समय मं स्वास्थ्य जांच, आरामदायक चप्पल-जूता, चश्मा अउ बने भोजन आपके काम करे के क्षमता बचाथे; एमा कटौती करना आगे चलके जादा महंगा परथे।
  • कीमत के संग ‘उपयोग के समय’ जोड़व: जेन चीज आप रोज आठ घंटा उपयोग करथव—जइसे काम के कुरसी या बिस्तर—ओमा थोरिक बने पैसा लगाना फिजूलखर्ची नोहय।
  • साल मं एक बेर ‘भविष्य के तारीख’ के समीक्षा करव: अपन जीवनसाथी संग बइठ के तय करव कि कोन से तीन अनुभव हमन ल ए बछर जीना हे, ओला दस बछर बाद बर नइ छोड़ना हे।

वैदिक जोतिस मं द्वितीय भाव, एकादश भाव, शनि अउ गुरु के संतुलन

वैदिक जोतिस मं कुंडली के दूसरा भाव (द्वितीय भाव) संचित धन, कुटुंब अउ वाणी ल देखाथे, जबकि ग्यारहवां भाव (एकादश भाव) नियमित आय अउ चौथा भाव मन के संतोष तथा सुख के उपभोग ल देखाथे। शनि ल संयम, मितव्ययिता अउ दीर्घकालीन सुरक्षा के कारक माने गे हे, अउ बृहस्पति (गुरु) ल विवेक, उदारता अउ जीवन के सार्थक विस्तार के कारक माने गे हे। जब ककरो चार्ट या विंशोत्तरी दशा मं शनि के प्रभाव बहुत कड़ा हो जाथे अउ चंद्रमा या चतुर्थ भाव ऊपर दबाव रहिथे, त मनखे तिजोरी भरे के बाद घलो भीतर ले अभाव के डर महसूस करथे; ओ ह धन जोड़थे (द्वितीय भाव) फेर ओकर सुख नइ ले पावय (चतुर्थ भाव)। जोतिस कोनो निवेश या संपत्ति खरीदे के तारीख तय करे के औजार नोहय, बल्कि ये अपन स्वभाव के अति ल समझे के दर्पण आय। जइसे राशिफल के डर ले अपन तय योजना ल रद्द करना बुद्धिमानी नोहय, वइसनेच बिना जरूरत के डर मं आज के जीवन ल सुखाना घलो उचित नइ हे। आप अपन जन्म-पत्री ल निःशुल्क कुंडली पन्ना मं देख सकथव, अउ अगर अपन दशा अउ स्वभाव के गहराई ल समझना चाहथव त Astro Ratan के सदस्यता योजना पन्ना देख सकथव, जिहां एक रुपिया के ट्रायल अउ बिना प्रति-मिनट शुल्क के अपन सटीक चार्ट ऊपर छत्तीसगढ़ी समेत भारतीय भाखा मन मं गोठिया सकथव।

तीरथराम के नवा चश्मा अउ महानदी तीर के संझा

तीरथराम ह ओ सनिच्चर अपन महीना के बजट मं पंद्रह सौ रुपिया के एक अलग ‘परिवार-सुख मद’ लिखिस। ओ ह सबले पहिली बाजार जाके अपन धागा बंधाए चश्मा के नवा फ्रेम लगवाइस, अउ इतवार बिहनिया गायत्री अउ तोषिनी ल तइयार होए बर कहिस। तीनों झन बस मं बइठ के सिरपुर गें, प्राचीन लक्ष्मण मंदिर के ईंट के नक्काशी देखिन, अउ महानदी के खुली हवा मं बइठ के घर ले लेगए ठेठरी-खुरमी अउ गरम चाय खाइन। संझा तक कुल साढ़े चार सौ रुपिया खर्च होइस। सोमवार बिहनिया जब तीरथराम मंडी के गद्दी मं बइठिस, त ओकर बैंक के जमा-पूंजी ज्यों-के-त्यों सुरक्षित रहिस, फेर नवा चश्मा ले खाता के अक्षर एकदम साफ दिखत रहिस अउ मन मं बेटी के खिलखिलाहट गूंजत रहिस।

Key takeaways

  • अनुशासित बचत अउ अभाव के डर मं फरक होथे; जब बैंक मं पर्याप्त जमा रहे के बाद घलो एक कप चाय या जूता खरीदे मं घबराहट होवय, त वो सावधानी नोहय, चिंता आय।
  • आज के छोटे-छोटे सुख ल हमेशा काल्ह ऊपर टारते रहे ले परिवार के यादगार पल हाथ ले फिसल जाथें अउ मन भितर ले रूखा होए लगथे।
  • मासिक बजट मं बचत अउ घर खर्च के बाद एक छोटे ‘आज के खुशी’ मद तय कर लेय ले बिना योजना बिगाड़े अपराध-बोध खतम हो जाथे।
  • पइसा के असली काम जिनगी ल सहारा देना आय, जिनगी ल बंधक बनाके तिजोरी के चौकीदारी कराना नोहय।

जेन संगवारी भविष्य के चिंता मं आज अपन अउ परिवार के हर छोटे खुशी ल मारत हे, ओला ये लेख जरूर भेजव।

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FAQ

मोर तीर आपातकालीन कोष अभी पूरा नइ होय हे; का तब घलो मोला आज के खुशी मं पइसा खर्च करना चाही?

कहूँ आपका आपातकालीन कोष अभी बनत हे, त बड़े खर्च रोकना बिल्कुल सही हे। फेर तब घलो महीना मं सौ-दू सौ रुपिया के कोनो बहुत छोटे, तय राहत—जइसे परिवार संग बगीचा मं भेल खाना या मनपसंद किताब लाना—बजट मं रखव ताकि बचत के सफर सजा जइसन झन लगय।

जब भी मैं अपन ऊपर कुछु खर्च करथंव त मोला अपन दाई-ददा के संघर्ष सुरता आथे अउ अपराध-बोध घेर लेथे, का करंव?

आपके दाई-ददा ह संघर्ष इही सेती करिन ताकि आपके जिनगी मं सुरक्षा अउ सहजता आ सकय। जब आप जिम्मेदारी ले बचत करे के बाद अपन सेहत अउ परिवार के मुस्कान मं थोड़ा खर्च करथव, त आप उनकर मिहनत के अपमान नइ करत हव, बल्कि ओकर सुग्घर फल देखत हव।

मोर जीवनसाथी के हाथ खुला हे अउ मैं बचा के चलथंव; हमर बीच रोज इही बात मं तकरार होथे, एला कइसे सुलझावव?

जब एक झन जादा डरथे त दूसर झन प्रतिक्रिया मं जादा बागी हो जाथे। दूनों झन मिलके महीना के सुरुआत मं बचत के रकम पहिली अलग कर देवव, अउ ओकर बाद दूनों झन बर एक बराबर, छोटे ‘निजी खर्च राशि’ तय कर देवव जेकर हिसाब कोनो दूसर ले झन मांगय।

कइसे जानंव कि मोर बचत के आदत स्वस्थ अनुशासन आय कि जरूरत ले जादा घबराहट?

एक सीधा सवाल पूछव: का बैंक मं लक्ष्य के मुताबिक रकम रहे के बाद घलो फटे जूता बदले या बीमार परे मं दवई लेय मं मन कचोटथे? कहूँ जरूरी रखरखाव घलो आप ल नुकसान लगथे, त ये अनुशासन नइ बल्कि सुरक्षा के घबराहट आय जेला धीरे-धीरे ढीला करे के जरूरत हे।