पैघ बेटी परिवारक बिना पगारक ‘crisis manager’ कहिया बनि गेलीह?
अस्पताल, झगड़ा, जन्मदिन आ राति-बिरातिक फोन जँ सदिखन एक्के लोकक माथ पर हो, तँ ओ प्रेम सँ बेसी एकटा अनदेखल नोकरी भऽ जाइत अछि।
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परिवारक संकट सम्हारब प्रेम सँ शुरू होइत अछि, मुदा जखन सभ काज बिना पुछने एक्के लोक पर आबि जाइत अछि तँ ओ अनदेखल श्रम बनि जाइत अछि। समाधान काज छोड़ब नहि, ओकरा देखाएब आ बाँटब अछि: एक सप्ताह धरि प्रत्येक संकटक काज लिखू, ओकरा श्रेणी मे बाँटू, आ प्रत्येक श्रेणीक लेल एकटा नामित जिम्मेदार आ एकटा सहायक प्रस्तावित करू।
मायागंजक गलियारा, राति एक बजि कऽ चालीस मिनट
भागलपुरक मायागंज अस्पतालक मेडिसिन वार्डक बाहर एकटा बेंच। चौंतीस वर्षक सुप्रिया मंडल एक हाथ मे पिताक फाइल आ दोसर हाथ मे फोन लेने बैसल छथि। साँझ मे बाबूजीक सुगर अचानक बढ़ि गेलनि, आ एम्बुलेंस बजाएब, भर्ती करबाएब, डॉक्टर सँ गप्प करब, सभ सुप्रिये कएलनि, जे तिलकामाँझी लगक एकटा स्कूल मे हिन्दी पढ़बैत छथि आ जिनकर अपन नओ वर्षक बेटा घर मे पतिक संग सुतल अछि। फोन पर तीन मेसेज एक संग आएल छल। दिल्लीक द्वारका सँ छोट भाइ: “किछु जरूरति हो तँ कहब दीदी।” परिवारक ग्रुप मे माए आ भौजीक बीच भानसक बात पर तेसर दिनक झगड़ा। आ जमशेदपुर सँ छोट बहिन: “दीदी, मंगल दिन मुन्नाक जन्मदिन छैक, केक अहीं ऑर्डर कऽ दिअ, अहाँ ओतहि छी।”
‘अहाँ ओतहि छी’
सुप्रिया बहिनक मेसेज पर हँसि देलनि, थाकल हँसी। ‘अहाँ ओतहि छी’ ई तीन शब्द हुनकर जिनगीक पूरा व्यवस्था बुझबैत अछि। चौदह वर्षक उमेर मे जखन माए एक मास बीमार छलीह, सुप्रिया भानस सँ लऽ कऽ छोट भाइ-बहिनक होमवर्क धरि सम्हारलनि। सभ प्रशंसा कएलक, “बड़ बुझनुक बेटी अछि।” ओहि प्रशंसा मे एकटा चुपचाप नियुक्ति छल जे बीस वर्ष बाद एखनो चलि रहल अछि। जकरा सँ काज होइत अछि, फोन ओकरे जाइत अछि। आ जे कहियो ‘ना’ नहि कहैत अछि, ओकरा सँ केओ पुछितो नहि अछि।
एक सप्ताह, सभटा काज लिखल
बाबूजी घर घुरलाह तँ सुप्रिया एकटा काज कएलनि जे पहिने कहियो नहि कएने छलीह: एक सप्ताह धरि प्रत्येक एहन काज एकटा कॉपी मे लिखलनि जे परिवारक कोनो संकट वा जरूरति सँ जुड़ल छल। कोनो शिकायत नहि, मात्र तारीख, काज आ समय। सप्ताहक अन्त मे पन्ना पर तेइसटा पाँति छल, जाहि मे एगारहटा राति नओ बजेक बाद भेल छल। किछु उदाहरण:
- सोम: बाबूजीक दबाइक नव पर्ची, तीनटा दोकान घुमि कऽ एकटा इंजेक्शन भेटल।
- मंगल: माए आ भौजीक झगड़ा मे दूनू सँ अलग-अलग पैंतालीस मिनट फोन।
- बुध: मौसेरी बहिनक बियाहक कथा लेल बरतुहारक परिवार सँ गप्प, किएक तँ मौसी केँ ‘सुप्रिया ठीक सँ बात करैत अछि’।
- बृहस्पति: भाइक होम लोनक किस्त चूकल, बैंकक फोन सुप्रिया केँ आएल किएक तँ पुरान फॉर्म मे हुनकर नम्बर छल।
- शुक्र: मुन्नाक केक, आ बाबूजीक पेंशनक जीवन प्रमाणपत्रक तारीख मोन पाड़ब।
- रवि: पित्तिक संग जमीनक पुरान विवाद पर राति साढ़े दस बजे एकटा ‘बस पाँच मिनट’क फोन, जे एक घंटा चलल।
प्रेम आ बिना पगारक प्रबन्धन मे अन्तर
ई सूची देखि कऽ सुप्रियाक पहिल भावना ग्लानि छल: की हम हिसाब राखि रहल छी? प्रेम ई अछि जे बाबूजी बीमार पड़थि तँ अहाँ दौड़ैत छी। बिना पगारक प्रबन्धन ई अछि जे तीन भाइ-बहिन रहितो सभ दौड़ मात्र अहाँक हिस्सा मे आबय, आ केओ एकरा काज नहि मानय। एहि व्यवस्था सँ किछु बचैत सेहो अछि: घर चलैत रहैत अछि, संकट बिगड़ैत नहि अछि, आ अहाँ केँ अपन जगह पक्का लगैत अछि। मुदा दाम ओतबे पैघ अछि: अहाँक नीन, स्कूल सँ लेल गेल आधा छुट्टी, अपन बेटाक होमवर्क, आ भीतर जमा होइत तामस जे कखनो माए पर तीखा बोल बनि कऽ निकलैत अछि। आ एकटा खतरा जे केओ नहि देखैत अछि: जँ अहीं बीमार पड़ि जाइ, तँ घरक पूरा व्यवस्था एक्के खुट्टा पर ठाढ़ अछि।
जे प्रमाण एखनो नहि अछि
सुप्रिया लग एकटा धारणा छल: भाइ आ बहिन मदद नहि करता। मुदा ईमानदारी सँ देखलनि तँ बुझाएल जे हुनका सभ केँ कहियो कोनो निश्चित काज देले नहि गेल छल। ‘किछु जरूरति हो तँ कहब’ एकटा दयालु वाक्य अछि, मुदा ओ सोचबाक, माँगबाक आ पाछाँ लागबाक भार फेर सुननिहारे पर दऽ दैत अछि। भाइ-बहिन सत्ते संग देताह की नहि, से तखने पता लागत जखन हुनका नाम सँ काज भेटतनि।
प्रत्येक काजक एकटा मालिक, एकटा सहायक
सुप्रिया अपन तेइस पाँति केँ छओ श्रेणी मे बाँटलनि, आ प्रत्येक लेल एकटा प्रस्ताव लिखलनि। सहायक एहि लेल जे मालिक कखनो उपलब्ध नहि हो तँ काज फेर सँ सुप्रिया पर नहि घुरय।
| काजक श्रेणी | एखन के करैत अछि | प्रस्तावित मालिक | सहायक |
|---|---|---|---|
| डॉक्टर, दबाइ आ जाँचक तारीख | सुप्रिया | भाइ, दिल्ली सँ ऑनलाइन दबाइ आ कैलेंडर | सुप्रिया, मात्र आपात स्थिति मे |
| अस्पतालक रातिक पाली | सुप्रिया | बारी-बारी: सुप्रियाक पति, ममियौत भाइ, सुप्रिया | भाइ छुट्टी लऽ कऽ |
| बिल, किस्त, पेंशनक कागज | सुप्रिया | भाइ | बहिन जाँच करतीह |
| घरक झगड़ा मे बीच-बचाव | सुप्रिया | केओ नहि; दूनू पक्ष सोझ गप्प करथि | गम्भीर हो तँ परिवारक बैसकी |
| जन्मदिन, पाबनि, नोत-हकार | सुप्रिया | बहिन | भौजी |
| राति मे माएक चिन्ताक फोन | सुप्रिया | भाइ-बहिन बारी-बारी सँ | सुप्रिया, भोरक समय मे |
शिकायत नहि, प्रस्ताव
परिवारक वीडियो कॉल पर सुप्रिया एना शुरू कएलनि: “हम कोनो काज छोड़ि नहि रहल छी, बाँटि रहल छी। पिछला सप्ताह हम ई सभ लिखलहुँ, पढ़ि लिअ। हम चाहैत छी जे बाबूजी-माएक देखभाल हमरा सभ तीनूक हो, मात्र हमर नहि।” फेर प्रत्येक पाँति पर नाम लऽ कऽ पुछलनि, “भैया, दबाइ आ जाँचक तारीख अहाँ सम्हारि सकब?” हँ वा ना, मुदा एकटा स्पष्ट उत्तर। पहिल प्रतिक्रिया अपेक्षित छल: “दीदी, अहाँ तँ लगे मे छी, अहाँ सँ नीक के करत?” सुप्रियाक जवाब छोट छल: “लगे मे छी, तेँ सभ किछु हमरे पर नहि होएबाक चाही।”
कनेक कम नीक, मुदा बाँटल
बँटवाराक बाद पहिल मास मे भाइ एक बेर दबाइक ऑर्डर मे देरी कएलनि, आ बहिन एकटा नोत बिसरि गेलीह। सुप्रियाक हाथ फोन दिस बढ़ल, जेना सदिखन बढ़ैत छल। जँ पहिल गलती पर काज फेर सँ अपने लऽ लेब, तँ सभ केँ एकटा पुरान पाठ फेर भेटत: अन्त मे दीदी सम्हारि लेतीह। कनेक कम नीक काज सहब, आ मालिक केँ स्वयं ठीक करबाक मौका देब, एहि व्यवस्थाक सभ सँ कठिन हिस्सा अछि। भावनात्मक काज सेहो बँटैत अछि: राति एगारह बजे माएक चिन्ताक फोन पर ई कहब सिखू, “माए, काल्हि भोर आठ बजे हम फोन करब, आइ भैया सँ गप्प करू।”
जखन थकान हद सँ बाहर हो
बहुत पैघ बेटी सभ ई तखने बुझैत छथि जखन देह जवाब दऽ दैत अछि: नीन नहि आएब, बिना कारणे कानब, सभ पर तामस, वा ई भावना जे हमर अपन कोनो जिनगी नहि बचल। ई कमजोरी नहि, वर्षक वर्ष ढोअल भारक असर अछि। एहन मे ककरो सँ गप्प करब जरूरी अछि, आ ओ परिवारक बाहरक केओ भऽ सकैत अछि। Tele-MANAS 14416 पर (1-800-891-4416 सेहो) चौबीसो घंटा निःशुल्क गप्प भऽ सकैत अछि, हिन्दी आ बहुत रास भारतीय भाषा सभ मे। जँ कखनो अपन वा ककरो सुरक्षा पर तुरन्त खतरा लागय, तँ 112 पर फोन करू।
कुंडली आ ‘जिम्मेदार’ सन्तान
किछु परिवार मे कहल जाइत अछि जे पैघ सन्तानक कुंडली मे चतुर्थ भाव, जे घर आ माएक भाव मानल जाइत अछि, ‘भारी’ अछि, तेँ सेवा ओकरे भाग्य मे लिखल। एहन कोनो वाक्य ककरो पर परिवारक पूरा भार राखबाक कारण नहि भऽ सकैत अछि। कुंडली स्वभाव आ समयक चर्चा करैत अछि; काजक बँटवारा परिवार अपन निर्णय सँ करैत अछि। जँ परिवारक सदस्यक प्रश्न अछि, तँ प्रत्येक व्यक्तिक चार्ट हुनके सहमति सँ बनाउ। पारिवारिक ज्योतिष पन्ना पर Astro Ratan, जे एकटा AI वैदिक ज्योतिषी अछि, परिवारक प्रत्येक सदस्यक प्रोफाइल हुनकर अपन कुंडली सँ राखि सकैत अछि। शुरुआत लेल निःशुल्क कुंडली सेहो बना सकैत छी।
प्रेम मे दौड़ब एक बात अछि; सभक हिस्साक दौड़ असगरे दौड़ब दोसर।
तीन मास बाद
तेसर मास बाबूजीक फेर जाँच छल। एहि बेर तारीख भाइक कैलेंडर मे छल, आ ओ द्वारका सँ डॉक्टर केँ फोन कऽ कऽ रिपोर्ट मँगौलनि। माए तखनो पहिल फोन सुप्रिये केँ कएलनि। सुप्रिया कहलनि, “माए, ई भैयाक जिम्मा अछि, हुनका सँ पूछू।” फोन रखलाक बाद हुनका कनेक ग्लानि भेलनि, आ ओही संग एकटा हल्लुकपन जे बहुत वर्ष सँ नहि भेल छल। ओहि साँझ ओ अपन बेटाक संग घाट पर टहलय गेलीह, आ फोन घरे पर छूटल रहल।
Key takeaways
- जे काज लिखल नहि जाइत अछि से परिवार केँ देखाइ नहि पड़ैत अछि; एक सप्ताहक सूची पहिल कदम अछि।
- भाइ-बहिन केँ ‘किछु जरूरति हो तँ कहब’ सँ नहि, एकटा नामित काज सँ जोड़ू।
- काज बाँटलाक बाद ओ कनेक कम नीक होएत; ओहि कमी केँ सहब सेहो बँटवाराक हिस्सा अछि।
- कुंडली ककरो पर जिम्मेदारी नहि लिखैत अछि; परिवारक काजक बँटवारा परिवारक निर्णय अछि।
जे दीदी सभक संकट मे पहिल फोन उठबैत छथि, हुनका ई लेख पठाउ; एहि मे भार बाँटबाक एकटा ठोस तरीका अछि।
परिवारक प्रत्येक सदस्यक प्रश्न हुनकर अपन कुंडली सँ, हुनकर सहमति सँ पूछू; भार बाँटबाक निर्णय अहाँ सभक रहत।
