पाबनि मे भरल घर, तैयो मोन असगर किएक?
भीड़ मे असगर लागब कृतघ्नता नहि; ओ एकटा संकेत अछि जे अहाँ केँ लोक नहि, एकटा सच्चा गप्प चाही।
Direct answer
भरल घर मे असगर लागब सामान्य अछि, किएक तँ पाबनि मे लोक बहुत होइत अछि मुदा गप्प बेसी काल सतही रहैत अछि: बियाह, नोकरी, कमाइ। एहि भावना केँ कृतघ्नता नहि मानू; आभार आ असगरपन दूनू संग रहि सकैत अछि। पूरा पाबनि बदलबाक बदला एकटा व्यक्ति आ एकटा शान्त क्षण चुनू, आ ओहि मे बिना देखाबाक एकटा सच्चा गप्प करू।
खरनाक साँझ, भट्ठा बाजारक आँगन
पूर्णियाक भट्ठा बाजार मे देव परिवारक घर। छठक खरनाक साँझ, आँगन मे बाइस लोक। माए परबैतिन छथि, भानस घर मे माटिक चूल्हि पर रसियाव बनि रहल अछि, आ ओसारा पर पित्तियौत भाइ-बहिन सभ फोन पर रील देखि रहल अछि। तीस वर्षक रश्मि देव, जे भुवनेश्वरक पटिया मे एकटा आईटी कम्पनी मे एचआर मे छथि, काल्हिक ठेकुआक लेल आटा सानि रहल छथि। तीन घंटा मे हुनका सँ सात बेर पुछल गेल जे बियाह कहिया, दू बेर जे पगार कतेक, आ एक बेर जे ‘भुवनेश्वर मे कोनो लड़का-वड़का तँ नहि?’ रश्मि प्रत्येक बेर हँसलनि। परिवारक ग्रुप मे हुनकर खिंचल फोटो सभ सँ बेसी पसिन कएल गेल। ककरो ई नहि बुझल छल जे दू मास पहिने हुनकर चारि वर्षक सम्बन्ध टूटल अछि, आ ऑफिस मे छँटनीक गप्प चलि रहल अछि।
छत पर छठक गीत
राति एगारह बजे सभ सुति गेल तँ रश्मि छत पर चलि गेलीह। पड़ोसक घर सँ छठक गीत आबि रहल छल, वैह गीत जे नेना मे सुनि कऽ हुनका लगैत छल जे पूरा संसार एक्के आँगन अछि। आइ ओही गीत पर हुनकर आँखि भरि आएल, आ संगे एकटा ग्लानि: एतेक लोक, एतेक प्रेम, माएक व्रत, आ हम असगर अनुभव करैत छी? ई तँ कृतघ्नता भेल। ओ आँखि पोछि कऽ नीचाँ आबि गेलीह, आ भोर मे फेर हँसैत रहलीह।
भीड़ आ जुड़ाव एक्के चीज नहि
पाबनिक भीड़ बहुत किछु दैत अछि: परम्परा, पहिचान, ई भावना जे हम कोनो पैघ चीजक हिस्सा छी। मुदा भीड़ मे गप्पक एकटा अपन नियम होइत अछि। प्रश्न सुरक्षित होइत अछि, जवाब छोट, आ सभ किछु हल्लुक रहबाक चाही। बियाह, नोकरी, कमाइ, एहि तीन विषय पर सभ किछु पूछल जाइत अछि, मुदा ‘अहाँ कोना छी, सत्ते?’ केओ नहि पुछैत अछि, किएक तँ ओकर उत्तर लेल समय आ एकान्त चाही जे भीड़ मे नहि भेटैत अछि। भीड़ अहाँक देह केँ घेरि लैत अछि, मुदा मोन तक पहुँचबा लेल एकटा आओर दरबज्जा चाही। तेँ बाइस लोकक बीच सेहो असगर लागब सम्भव अछि, आ ई अहाँक कोनो दोष नहि।
आभार आ असगरपन संग-संग
रश्मिक ग्लानि मे एकटा गलत गणित छल: जँ हम असगर अनुभव करैत छी, तँ हम परिवारक प्रेम नहि देखि रहल छी। मुदा दूनू बात संग सत्य भऽ सकैत अछि। माएक व्रत आ पित्तीक हँसी-मजाक सँ प्रेम भेटैत अछि; आ ओहि प्रेम मे अहाँक टूटल सम्बन्ध आ नोकरीक डर लेल जगह नहि अछि। एहि भावना केँ अपना सँ एना कहि सकैत छी: “हम एहि घरक आभारी छी, आ एखन हमरा असगर लागि रहल अछि।” ई वाक्य ककरो दोष नहि दैत अछि, आ भावना केँ झुठलबितो नहि अछि। एकरा नाम देलाक बाद बेसी काल ओकर भार कनेक घटि जाइत अछि।
भीड़ की बचबैत अछि, एकान्त की माँगैत अछि
भीड़ मे हँसैत रहब एकटा सुरक्षा अछि: ककरो चिन्ता नहि होइत छनि, पाबनिक माहौल नहि बिगड़ैत अछि, आ अहाँ केँ अपन कमजोर बात खोलबाक खतरा नहि उठाबऽ पड़ैत अछि। एकर दाम ई अछि जे अहाँ घुरि कऽ जाइत छी ओतबे असगर जतबा आएल छलहुँ, आ प्रत्येक पाबनि ई दूरी बढ़बैत अछि। सच्चा गप्पक दाम सेहो अछि: भऽ सकैत अछि केओ बुझय नहि, वा बात पूरा गाम मे पसरि जाए। एखन रश्मि लग जे प्रमाण नहि छल, से ई जे परिवार मे केओ सुनितथि की नहि; किएक तँ ओ कहियो ककरो मौका नहि देने छलीह।
एकटा व्यक्ति, एकटा शान्त क्षण
पूरा परिवार केँ बदलब सम्भव नहि, आ जरूरी सेहो नहि। रश्मि मात्र एकटा प्रयोग तय कएलनि: पाबनि मे एकटा व्यक्ति, एकटा शान्त क्षण, आ ओहि मे एकटा सच्चा गप्प, बिना कोनो देखाबाक। पाबनि मे एहन क्षण भेटैत अछि, बस ओकरा चिन्हबाक अछि:
- भोरका अरघ लेल अन्हार मे घाट दिस जाइत रस्ता, जखन दौरा उठेने दू लोक संग चलैत छथि।
- राति मे बर्तन धोबैत काल, जखन आँगन खाली भऽ जाइत अछि।
- कोनो बूढ़-पुरान लग बैसि कऽ ऊँख छीलैत, जखन हाथ व्यस्त रहैत अछि आ आँखि मिलेबाक दबाब नहि।
- बजार सँ केरा वा सूप अनबा लेल बाइक पर जाइत, दस मिनटक एकान्त।
- पाबनि बितलाक दोसर दिन, जखन सभ थाकल अछि आ केओ हड़बड़ी मे नहि।
सौरा घाटक रस्ता
रश्मि बाबूजी केँ चुनलनि। भोर साढ़े चारि बजे दूनू दौरा उठेने सौरा नदीक घाट दिस चलि रहल छलाह; आगाँ-पाछाँ लोक, मुदा अन्हार मे एकटा अपन एकान्त। रश्मि बिना भूमिकाक कहलनि, “बाबूजी, हमर सम्बन्ध टूटि गेल अछि, आ ऑफिस मे नोकरीक डर अछि। घर मे सभ बियाहक पुछैत अछि, हम किछु कहि नहि पबैत छी।” बाबूजी किछु डेग चुप रहलाह। फेर कहलनि, “तोहर माए केँ व्रत सँ उठऽ दहक, फेर हम सभ बैसब।” घाट पहुँचैत-पहुँचैत ओ एक बेर कहलनि, “अगिला बेर केओ बियाहक पुछतौ तँ हम जवाब देबैक।” ई कोनो समाधान नहि छल। मुदा पहिल बेर पाबनि मे रश्मि केँ लागल जे केओ हुनका देखलक।
जँ ओहि एकटा गप्प सँ सेहो किछु नहि बदलय
प्रत्येक प्रयास एहने नहि होइत अछि। भऽ सकैत अछि जकरा चुनलहुँ ओ बात हँसी मे उड़ा देथि, वा सलाहक झड़ी लगा देथि। तखनो अहाँ किछु नहि गमौलहुँ; अहाँ ई बुझलहुँ जे एहि घर मे ओ व्यक्ति कोन तरहक श्रोता छथि। तखन ओहि क्षण मे कोनो पुरान मित्र केँ फोन करू जे अहाँ केँ बिना पाबनिक सजावटक जनैत अछि। आ जँ पाबनि बितलाक बाद सेहो असगरपन आ उदासी नहि जाए, नीन आ भूख बदलि जाए, वा मोन मे एहन विचार आबय जे जिनगीक कोनो अर्थ नहि, तँ ई मात्र पाबनिक बात नहि रहल। Tele-MANAS 14416 पर (1-800-891-4416 सेहो) चौबीसो घंटा निःशुल्क गप्प भऽ सकैत अछि, हिन्दी आ बहुत रास भारतीय भाषा सभ मे। तुरन्त खतरा लागय तँ 112 पर फोन करू।
सूर्यक पाबनि, आ अपन दिनक शुरुआत
छठ सूर्यक उपासना अछि, कार्तिक शुक्ल षष्ठी केँ साँझक अरघ आ सप्तमीक भोर उगैत सूर्य केँ अरघ। ज्योतिष मे सूर्य आत्मा आ पहिचानक कारक मानल जाइत अछि, आ किछु लोक एहने समय अपन कुंडली मे सूर्य आ चन्द्रमाक स्थिति देखि कऽ अपन स्वभाव केँ बुझबाक प्रयास करैत छथि। एहि तरहक बुझाइ सहायक भऽ सकैत अछि, मुदा कोनो ग्रह असगरपनक दोषी नहि, आ ओकर इलाज ककरो संग एकटा सच्चा गप्प अछि। जँ पाबनिक बाद दिनक शुरुआत अपन कुंडली सँ जुड़ल एकटा शान्त सलाह सँ करय चाहैत छी, तँ Astro Ratan, एकटा AI वैदिक ज्योतिषी, दैनिक मार्गदर्शन दैत अछि। माए-बाबूक बढ़ैत उमेर आ भाइ-बहिनक बीच जिम्मेदारीक प्रश्न पर ई लेख सेहो पढ़ि सकैत छी।
भीड़ देह केँ घेरैत अछि; मोन धरि पहुँचबा लेल मात्र एकटा लोक आ एकटा शान्त रस्ता चाही।
भुवनेश्वरक ट्रेन
पारनक दोसर दिन रश्मि भुवनेश्वरक ट्रेन मे बैसलीह। झोरा मे माएक देल ठेकुआ छल। बरौनी स्टेशन पर बाबूजीक मेसेज आएल, “पहुँचि कऽ फोन करिहऽ। आ ओ ऑफिस वला बात, डरिहऽ नहि।” रश्मि ओ मेसेज दू बेर पढ़लनि। अगिला पाबनि मे फेर बाइस लोक होएत, फेर वैह प्रश्न। मुदा आब ओहि भीड़ मे एकटा लोक छल जे हुनकर असल हाल जनैत छल।
Key takeaways
- भीड़ आ जुड़ाव दू अलग चीज अछि; बाइस लोकक बीच सेहो केओ अहाँ केँ नहि देखि सकैत अछि।
- ‘हम आभारी छी आ तैयो असगर लागि रहल अछि’, ई दूनू बात एक संग सत्य भऽ सकैत अछि।
- पूरा परिवार सँ नहि, एकटा व्यक्ति सँ, एकटा शान्त क्षण मे, एकटा सच्चा वाक्य सँ शुरू करू।
- जँ पाबनि बितलाक बाद सेहो असगरपन आ उदासी नहि घटय, तँ ओकरा गम्भीरता सँ लिअ आ सहायता माँगू।
जे संगी पाबनि मे सभ सँ बेसी हँसैत देखाइत छथि, हुनको कखनो ई लेख चाही; एहि मे भीड़ मे एकटा असल गप्प तकबाक रस्ता अछि।
पाबनिक भीड़ बितलाक बाद अपन दिनक शुरुआत अपन कुंडली सँ जुड़ल एकटा शान्त सलाह सँ करू, आ जुड़ावक डेग अपने उठाउ।
