त्यौहार में घर भर्योड़ो, फेर ई मन सूनो क्यूं?
त्यौहार री भीड़ में एकलापो कृतघ्नता कोनी; उणनै नाम देवण अर एक मिनख सागै एक साची घड़ी बणावण री बात।
Direct answer
भर्योड़ै घर में सूनो लागणो कृतघ्नता कोनी; एकलापो मिनखां री कमी सूं कोनी, पिछाणीजण री कमी सूं आवै। त्यौहार में सगळा आपरी भूमिका निभावै, अर एक-एक री बात रो बगत कोनी बचै। इण त्यौहार में फगत एक मिनख अर एक सांत घड़ी चुणो, अर उणसूं बिना दिखावै री एक साची बात करो। भीड़ बदळणी कोनी, उणमें एक दरवाजो खोलणो है।
नवलगढ़ री हवेली, तेईस जणा अर एक खाली कुरसी
नवलगढ़ में पोद्दार परिवार री पुराणी हवेली में दिवाळी री रात तेईस जणा है: काकोसा रा टाबर, भूवासा रो परिवार, अर गळी रा आधा बड़ेरा जिका राम-राम करण आया। पैंतीस बरस री अंजु पोद्दार नोएडा री एक बीमा कंपनी री HR में है अर पांच दिन री छुट्टी लेय'र आई है। दिनूगै सूं बा भतीज्यां सागै रंगोळी मांडी, सौ दीवां में तेल घाल्यो, तीन बार फोटो सारू मुळकी, अर तीन बार ओ ई सवाल सुण्यो, 'ब्याव कद करसी?' चचेरी बैनां टाबरां रै स्कूल रै दाखलै री बात में लाग्योड़ी है, भाई पटाखां रो हिसाब करै, अर मां आखो दिन रसोई में। चौक में दादोसा री कुरसी पाछलै बरस सूं खाली है, अर उण माथै कोई बैठै कोनी। लक्ष्मी पूजन पछै रात ग्यारह बजै अंजु एकली छत माथै गई। नवलगढ़ री हवेलियां माथै आतिशबाजी फूटै, नीचै सूं हंसी आवै, अर अंजु नै लागै जाणै बा आपरै ई घर में मैमान है। पछै एक और विचार आयो, जिको सगळां सूं भारी हो: 'इत्तो भर्योड़ो घर, अर म्हनै सूनो लागै; म्हैं ई नाशुकरी हूं कांई?'
भीड़ में एकलापो नाशुकरी कोनी
एकलापो मिनखां री गिणती सूं कोनी नापीजै। कोई एकलो कमरै में ई जुड़्यो महसूस कर सकै, अर कोई तेईस जणां बीच ई सूनो। फरक इण बात रो है कै थांनै कोई साचाणी पिछाणै कै कोनी: थांरी हाल री जिंदगी, थांरा डर, थांरी खुसी। अंजु नै आखै दिन में किणी ओ कोनी पूछ्यो कै नोएडा में उणरो काम कियां चालै, या दादोसा बिना ओ पैलो दिवाळी उणनै कियां लागै। उणरी भूमिका ही, उणरी बात कोनी। इण सारू उणरो सूनोपण घर रो अपमान कोनी; ओ फगत इण बात रो संकेत है कै उणरो मन कीं ऊंडो मांगै।
त्यौहार इणनै क्यूं बधावै
त्यौहार में हर मिनख एक भूमिका में बंध जावै: मां रसोई री मालकण, भाई पटाखां रो इंतजाम करणियो, अंजु 'नोएडा वाळी' अर 'जिकी रो अजै ब्याव कोनी व्हियो'। भूमिका निभावण में बगत पूरो लाग जावै, अर एक-एक री बात सारू कोई कोनो कोनी बचै। भीड़ में तुलना ई बेसी व्है: किणरा टाबर, किणरी गाडी, किणरो ब्याव। अर जिकी कुरसी खाली है, उणरो दुख त्यौहार री रोसणी में बेसी दीखै, क्यूं कै सगळा उणनै टाळ'र चालै। बाकी साल ओ दुख चुपचाप रैवै, दिवाळी री रात बो सामै ऊभो व्है जावै।
भीड़ अर जुड़ाव, दोनां री आपरी जगां
भीड़ री आपरी कीमत है। बा परंपरा बचावै, टाबरां नै आपरो कुनबो दिखावै, अर बड़ेरां नै लागै कै घर अजै एक है। इणनै छोटो मानणो ई गलत व्हेसी। पण भीड़ में जुड़ाव सतह माथै रैवै; उणमें दिखावो लागै, थकावट लागै, अर साची बात रो मौको कोनी मिलै। जुड़ाव सारू सांति चाहिजै, एक-सूं-एक री बात चाहिजै, अर थोड़ो जोखिम ई: जे थे मन री बात कैवो अर सामलो कोनी समझै तो? अर एक बात अंजु नै अजै ठा कोनी: कांई इण घर में कोई और ई इयां ई सूनो महसूस करै? त्यौहार में ओ पूछणो ई कोई कोनी।
एक मिनख, एक सांत घड़ी
पूरो त्यौहार बदळण री कोसिस थकावै। अंजु एक छोटो प्रयोग करियो: बाकी दिनां में फगत एक मिनख अर एक सांत घड़ी चुणणी, अर उणरै सागै बिना दिखावै री एक बात करणी। मिनख इसो चुणो जिको थांनै सुणै, जिको भीड़ में ई थोड़ो एकलो लागै, अर जिकै सागै पुराणी कोई सांझी याद व्है। घड़ी इसी चुणो जद घर जाग्यो कोनी व्है या सगळा सूय ग्या व्है: दिनूगै री चाय, छत री सिंझ्या, मिंदर तांई री पैदल। अंजु आपरा बापूजी नै चुण्या। दिवाळी रै दूजै दिनूगै, राम-राम री भीड़ आवण सूं पैलां, साढ़ा छह बजै बा दो कप चाय लेय'र चौक में गई, दादोसा री कुरसी रै कनै।
चौक में साढ़ा छह बजै
अंजु कोई भूमिका कोनी निभाई। उण फगत पूछ्यो, 'बापूजी, दादोसा बिना ओ पैलो दिवाळी थांनै कियां लाग्यो?' बापूजी कीं ताळ कुरसी देखता रैया, पछै बोल्या कै काल रात पूजा में उणां नै दादोसा री आवाज याद आई, जिकी हर बरस आरती में सुर सूं आगै भाजती। पछै उणां पूछ्यो, 'थूं नोएडा में ठीक है नीं? फोन माथै तो सदा ठीक ई कैवै।' बीस मिनट री आ बात दो बरसां में दोनां री पैली साची बात ही। भीड़ आई, राम-राम व्ही, अर दिन पाछो आपरी भूमिकावां में ढळग्यो, पण अंजु रो मन उण दिन सूनो कोनी रैयो।
बिना दिखावै री बात कियां सरू करां
एक साचो सवाल घणी बार आखी भीड़ सूं बेसी काम करै। कीं इसा सवाल जिका जवाब सारू जगां छोडै:
- 'इण बरस थांनै सगळां सूं भारी कांई लाग्यो?'
- 'जिका घर में कोनी, उणां री कुणसी बात आज याद आई?'
- 'थे म्हारै बाबत कांई जाणणो चावो, जिको कदै पूछ्यो कोनी?'
- 'बचपण री दिवाळी री कुणसी बात अजै याद है?'
भीड़ घर नै भरै; एक साची बात मन नै।
जे बात कोनी बणी, या थे घरै ई कोनी पूगा
कदै-कदास चुण्योड़ो मिनख बात टाळ देवै, या घड़ी भीड़ में गम जावै। इणसूं प्रयोग खराब कोनी व्हियो; अगलै दिन किणी और सागै कोसिस करो। अर जिका त्यौहार माथै घरै ई कोनी पूग सका, बै ई इयां ई करै: एक मिनख चुणो अर एक तय बगत माथै वीडियो कॉल करो, ग्रुप कॉल कोनी। जे ओ सूनोपण त्यौहार पछै ई हफ्तां तांई रैवै, नींद अर भूख घट जावै, या सगळो बेमतलब लागण लागै, तो आ त्यौहार री बात कोनी, मन री सेहत री बात है। Tele-MANAS रै 14416 नंबर माथै, या 1-800-891-4416 माथै, दिन-रात मुफ्त बात व्है सकै, हिंदी अर घणी भारतीय भासावां में; अर तुरंत खतरो लागै तो 112 माथै फोन करो।
अमावस री रात रो दीवो
दिवाळी रो लक्ष्मी पूजन कार्तिक री अमावस नै व्है, जद चंद्रमा आभै में दीखै कोनी। आपणी परंपरा सगळां सूं अंधारी रात नै दीवा जगावै। आ कोई भविस्यवाणी कोनी, फगत एक याद है कै अंधारै में एक दीवो ई रस्तो दिखावै। कुंडली थांनै ओ समझण में मदद कर सकै कै थांरो मन भीड़ में सुख पावै कै एक-सूं-एक री बात में; फ्री कुंडली सूं आपरो चार्ट बणावो। दैनिक मार्गदर्शन में Astro Ratan, एक AI वैदिक ज्योतिषी, थांरी सही कुंडली सूं रोज री एक छोटी बात भेजै, जिकी त्यौहार री भागदौड़ में थांनै आपरै मन कानी मोड़ सकै; बा इलाज कोनी, एक याद दिरावण वाळी बात है। अर जे घर में मां-बाप री बधती उमर री जिम्मेदारी ई भाई-बैनां बीच अणकैयो बोझ है, तो बूढ़ा मां-बाप अर भाई-बैन वाळो लेख ई पढ़ो।
Key takeaways
- एकलापो मिनखां री गिणती सूं कोनी नापीजै; भर्योड़ै घर में ई मिनख सूनो व्है सकै जे कोई उणनै साची पिछाणै कोनी।
- त्यौहार में हर मिनख एक भूमिका में बंध जावै, अर घर में किणी खाली कुरसी रो दुख ई इणी बगत बेसी चुभै।
- पूरो त्यौहार सुधारण री कोसिस मत करो; फगत एक मिनख अर एक सांत घड़ी चुण'र एक साची बात करो।
- सूनोपण हफ्तां तांई नींद, भूख अर उम्मीद खावै, तो Tele-MANAS 14416 माथै बात करो; तुरंत खतरो व्है तो 112।
जिकी बैन या भायलो त्यौहार में सगळां सागै मुळकै पण छत माथै एकलो ऊभो मिलै, उणनै ओ भेजो; इणमें एक मिनख अर एक घड़ी री छोटी सी बात है।
थांरो मन भीड़ में सुख पावै कै एक-सूं-एक री बात में, आपरी सही कुंडली सूं समझणो है? Astro Ratan रो दैनिक मार्गदर्शन आजमावो; त्यौहार अर फैसला थांरा ई है।
