जनम के सही समय नइखे मालूम? तबो ज्योतिष बेकार ना हो जाला
तारीख आ जगह पक्का होखे त बहुत कुछ देखल जा सकेला; बाकिर लग्न, भाव आ दशा के तारीख पर ईमानदारी से सावधानी चाहीं।
Direct answer
जनम के तारीख आ जगह पक्का होखे त शनि, गुरु, राहु-केतु, सूर्य जइसन ग्रह के राशि लगभग भरोसे लायक रहेला, आ चंद्र राशि भी अक्सर। बाकिर लग्न लगभग दू घंटा में बदलेला, एह से लग्न, भाव, नवांश आ दशा के तारीख समय बिना भरोसे लायक ना रहे। Rectification से एगो संभावित समय निकालल जा सकेला, पक्का समय ना।
अँगना में तीन गो याद
गोपालगंज के लगे थावे के एगो घर में साँझ के अँगना में खटिया बिछल रहे। अंजलि, 29 बरिस, बीच में बइठल रहली, काहे कि सिवान से आइल एगो रिश्ता के परिवार कुंडली माँगले रहे। जनम के तारीख पर केहू के शक ना रहे; panchayat के जनम प्रमाण पत्र में लिखल बा। बाकिर समय पर बहस छिड़ गइल। माई कहली, “सुकवा उगल रहे, भोर के चार बजत रहे।” नानी कहली, “ना रे, हम दाल चढ़वले रहनी, दुपहरिया रहे।” पापा हँस के कहलें, “हम त ओह घरी गोरखपुर में रहनी, चिट्ठी से खबर मिलल।” अंजलि के लागल कि एगो संख्या के बिना पूरा बात अटक गइल बा।
तीन याद, आठ घंटा के फरक
भोर के चार बजे आ दुपहरिया के बारह बजे के बीच आठ घंटा के फरक बा। कुंडली के कुछ हिस्सा खातिर आठ घंटा बहुत छोट बात बा, आ कुछ खातिर बहुत बड़। एह से “समय नइखे त सब बेकार” कहल भी गलत बा, आ “समय से का फरक पड़ेला” कहल भी गलत। ठीक रास्ता ई बा कि अलग-अलग कर के देखल जाव कि कवन बात समय पर टिकल बा आ कवन ना। अंजलि के तारीख आ जगह पक्का बा, आ ई दुनो बहुत काम के चीज बा।
पहिले घर के कागज खोजीं
अनुमान लगावे से पहिले पक्का सबूत खोजल सबसे सस्ता आ सबसे भरोसे वाला रास्ता बा। इहाँ-उहाँ से ई सब चीज मिल सकेला:
- अस्पताल भा nursing home के discharge पर्ची, जवना में अक्सर जनम के घंटा-मिनट लिखल रहेला।
- नगर निगम भा panchayat के जनम प्रमाण पत्र के असल register, जहाँ कबो-कबो समय दर्ज होला।
- परिवार के पंडित जी के हाथ से लिखल पुरान पत्रा भा जन्मपत्री, जवन जनम के बाद बनल रहे।
- बाबा-दादी भा पापा के पुरान डायरी, चिट्ठी, भा टीका के कार्ड।
- ओह दिन घर में मौजूद दाई भा पड़ोसी, जेकर याद कवनो पक्का घटना से जुड़ल होखे, जइसे रेडियो के समाचार भा ट्रेन के आवाज।
समय बिना का-का भरोसे लायक बा, आ का ना
नीचे के टेबल ओह हालत खातिर बा जब तारीख आ जगह पक्का होखे बाकिर समय में घंटन के शक होखे।
| कुंडली के हिस्सा | समय बिना | काहे |
|---|---|---|
| शनि, गुरु, राहु-केतु, सूर्य के राशि | लगभग भरोसे लायक | ई ग्रह एक दिन में बहुत कम खिसकेलन |
| बुध, शुक्र, मंगल के राशि | अक्सर भरोसे लायक | राशि के सीमा पर होखे त ओही दिन बदल सकेला |
| चंद्र राशि | अक्सर, पक्का ना | चंद्रमा एक दिन में लगभग 12 से 15 अंश चलेला |
| जनम नक्षत्र | अनिश्चित | एगो नक्षत्र 13 अंश 20 कला के होला, चंद्रमा ओकरा के लगभग एक दिन में पार करेला |
| लग्न आ बारह भाव | भरोसे लायक ना | लग्न लगभग दू घंटा में राशि बदलेला |
| नवांश (D9), दशमांश (D10) | भरोसे लायक ना | ई लग्न आ ग्रह के सूक्ष्म अंश पर टिकल बा |
| महादशा-अंतर्दशा के तारीख | तारीख भरोसे लायक ना | दशा के शुरुआत चंद्रमा के नक्षत्र में बचल हिस्सा से गिनल जाला |
दशा पर असर, एगो सीधा हिसाब
विंशोत्तरी दशा जनम के चंद्र नक्षत्र से शुरू होला, आ पहिला दशा केतना बाकी बा, ई एह पर टिकल बा कि चंद्रमा ओह नक्षत्र के केतना हिस्सा पार कर चुकल बा। चंद्रमा घंटा में लगभग आधा अंश चलेला, एह से आठ घंटा में लगभग चार से पाँच अंश। एगो नक्षत्र 13 अंश 20 कला के होला, मतलब आठ घंटा के शक नक्षत्र के लगभग एक तिहाई हिस्सा के शक बा। मान लीं चंद्रमा भरणी नक्षत्र में बा, जेकर स्वामी शुक्र बाड़ें आ शुक्र के महादशा 20 साल के होला। एक तिहाई के फरक मतलब जनम के समय बचल शुक्र दशा में लगभग छह-सात साल के फरक। ओकरा बाद आवे वाला हर दशा के तारीख ओतने खिसक जाई। एही से जे बिना समय के कहे कि “फलाना साल में राउर राहु दशा शुरू होई”, ओकरा से पूछीं कि ऊ कवन समय मान के चलत बा।
Rectification: अनुमान के तरीका, जादू ना
जनम के समय के अनुमान लगावे के तरीका के rectification कहल जाला। एमें जिनगी के कुछ पक्का घटना, जइसे पढ़ाई छूटल, भाई-बहिन के जनम, पहिला नौकरी, कवनो बड़ दुर्घटना भा बियाह, अलग-अलग संभावित समय वाली कुंडली से मिलावल जाला, आ देखल जाला कि कवन समय सबसे बढ़िया बइठत बा। नतीजा एगो काम चलावे वाला अनुमान होला, पक्का जनम समय ना। दू ज्योतिषी एके घटना से दू अलग समय निकाल सकेलन। ईमानदार तरीका ई बा कि निकालल समय के साथे लिखल रहे कि ई rectified बा, आ कवनो नया कागज मिल जाव त ओही के मानल जाव।
अंजलि के रिश्ता वाला सवाल
बियाह के बात में बहुत परिवार गुण मिलान करेलन, जवन चंद्र नक्षत्र पर टिकल होला। अंजलि के चंद्र नक्षत्र अगर भोर आ दुपहरिया दुनो समय पर एके बा, त मिलान पर समय के असर कम बा; अलग बा, त ई बात सिवान वाला परिवार के साफ बता दिहल ईमानदारी होई। मंगल दोष भी ज्यादातर लग्न से देखल जाला, जवन समय बिना पक्का ना होला; मांगलिक जाँच करीं त याद राखीं कि नतीजा राउर डालल समय पर टिकल बा। मंगल दोष कवनो हाल में बियाह के रोक ना ह, आ ओकर कई परंपरागत निवारण भी गिनल जाला। अनिश्चित जानकारी पर केहू के रिश्ता ना तोड़े के चाहीं।
जवन समय पता नइखे, ओकरा के पता नइखे कहल ही सबसे सही ज्योतिष के पहिला कदम ह।
अबहीं का करीं
सबसे पहिले ऊपर वाला कागज खोजीं। कुछ ना मिले, त मुफ्त कुंडली में दू-तीन संभावित समय डाल के देखीं कि कवन बात हर समय पर एके रहत बा; जवन ना बदले, ओह पर जादा भरोसा करीं। समय बिलकुल ना मालूम होखे त कई गणना दुपहरिया बारह बजे मान के बनावल जाला, एह से ओह कुंडली के लग्न आ भाव के अंदाजा भर मानीं। Astro Ratan, जवन एगो AI वैदिक ज्योतिषी ह, ओकरा से WhatsApp पर बात करत घरी साफ बता दीं कि समय पक्का नइखे आ कवन-कवन याद बा, ताकि बात ओही सावधानी से होखे। अंजलि आखिर में पुरान पत्रा खोज निकलली, जवना में समय “प्रातः” लिखल रहे, घंटा ना। तबो ऊ एगो बात साफ कर दिहलस कि माई के याद सही रहे।
Key takeaways
- तारीख आ जगह पक्का होखे त धीमा चले वाला ग्रह के राशि समय बिना भी लगभग ठीक रहेला।
- लग्न लगभग दू घंटा में राशि बदलेला, एह से समय बिना लग्न, भाव आ नवांश अंदाजा भर बा।
- चंद्रमा घंटा में लगभग आधा अंश चलेला; आठ घंटा के अनिश्चितता दशा के तारीख के कई साल खिसका सकेला।
- Rectification से एगो संभावित समय मिलेला, पक्का ना; जे पक्का बतावे, ओकरा से सवाल पूछीं।
जेकरा घर में जनम के समय पर तीन लोग तीन बात कहेला, ओकरा खातिर साफ हिसाब कि का पक्का बा आ का अंदाजा।
आपन पक्का तारीख, जगह आ समय के जेतना याद बा, सब बता के WhatsApp पर पूछीं कि राउर कुंडली के कवन बात भरोसे लायक बा।
