बोलचाल के भोजपुरी
Parent life transitionबोलचाल के भोजपुरी

लइका-लइकी दूर चल गइलें, घर सून बा—बाकिर जिनगी के नया अध्याय भी बा

सून घर के दुख के नाम दीं, बाईस बरिस के सेवा के हिसाब राखीं, आ फेर धीरे-धीरे अपना दिन, दोस्ती, मकसद आ जोड़ी के रिश्ता के नया बनाईं।

2026-11-07 7 min · 1,650 words

Direct answer

बच्चा के घर से जाए पर जवन खालीपन लागेला, ऊ सचमुच के दुख ह, कमजोरी ना। पहिले ओकरा के मानीं, आ बरिसन के देखभाल के काम के अपना नजर में मोल दीं। फेर छोट-छोट कदम उठाईं: दिन के नया ढाँचा, पुरान दोस्ती के फेर से जोड़ल, कवनो अइसन काम जवना में राउर हुनर लागे, आ जीवनसाथी के साथे बच्चा से अलग बातचीत। उदासी हफ्तन टिकल रहे त मदद लीं।

रात साढ़े नौ बजे बालकनी

जमशेदपुर के कदमा में दोसरा मंजिल के फ्लैट में उर्मिला सिन्हा, 51 बरिस, रात साढ़े नौ बजे फेर बालकनी में आ गइली। नीचे गली में एगो scooter रुकल, आ एक पल खातिर उनकर हाथ दुपट्टा सँभारे लागल। Scooter बगल वाला के बेटा के रहे। अनुराग दू महीना पहिले बेंगलुरु चल गइल, पहिली नौकरी पर; सोनम के बियाह पिछला साल पुणे में भइल। बाईस बरिस ले साढ़े नौ बजे के मतलब रहे कोचिंग से केहू के लवटल, थाली लगावल, “माई, आज का बनल बा?” अब भीतर रमेश जी TV पर खबर देखत बाड़ें, आ रसोई में दू आदमी के खाना बन के ठंडा हो रहल बा। उर्मिला बालकनी के रेलिंग पकड़ के सोचली, “हम अब का हईं?”

ई दुख ह, आ एकर नाम लिहल जरूरी बा

लोग कहेला, “अरे, अब त आराम बा, बच्चा लोग सेट हो गइल।” बात साँच भी बा, आ उर्मिला के गर्व भी बा। बाकिर गर्व आ दुख एके साथे रह सकेला। जवन आदमी बाईस बरिस ले रोज के घड़ी, खाना, बीमारी, परीक्षा आ मन के मौसम एगो दोसरा आदमी के हिसाब से चलवलस, ओकर दिन से अचानक ऊ केंद्र हट जाला। दुख एह बात के बा कि रोज के ऊ काम, जवना के केहू गिनत ना रहे, अब खतम भइल आ ओकरा के खतम होखे के कवनो विदाई भी ना भइल। एकरा के नाम दिहला से ई कम ना होला, बाकिर अकेले ढोवे के बोझ तनी हल्का होला।

बाईस बरिस के काम के हिसाब

  • दू बच्चा के बारह-बारह साल के स्कूल के टाइम-टेबल, परीक्षा, fees आ किताब के इंतजाम।
  • बुखार के रात, अस्पताल के चक्कर, आ दवाई के समय बिना भुलाइले याद राखल।
  • घर के बजट अइसे चलावल कि कोचिंग भी होखे आ बियाह के बचत भी।
  • बच्चा के दोस्त, टीचर आ रिश्तेदार, सबके बीच बात सँभारल।
  • किशोर उमिर के खीस, चुप्पी आ रोवल के बिना हार मनले झेलल।

ऊ उर्मिला कहाँ बाड़ी?

बियाह से पहिले उर्मिला राँची के कॉलेज में गणित में सबसे आगे रहत रहली, आ मोहल्ला के बच्चा लोग के मुफ्त में पढ़ावत रहली। कढ़ाई के शौक रहे, आ रेडियो पर गीत सुन के सुर मिलावत रहली। बरिसन में ई सब माई के भूमिका के नीचे दब गइल। एगो कॉपी लीं आ तीन खाना बनाईं। पहिला में लिखीं कि बच्चा से पहिले रउआ के का नीमन लागत रहे। दोसरा में लिखीं कि एह बरिसन में रउआ का-का सीखनी। तीसरा में लिखीं कि अगिला पाँच बरिस में कवन एक-दू चीज फेर से छूवे के मन बा। पहचान केहू बाहर से ना देला; ई पुरान आ नया के बीच खुदे जोड़ल जाला।

सबसे खटके वाली घड़ी के नया काम

हर घर में एगो घड़ी होला जवन सबसे जादा खटकेला। उर्मिला खातिर ऊ साढ़े नौ बजे रहे, केहू खातिर भोर के टिफिन बनावे के बेरा, केहू खातिर एतवार के दुपहरिया। ओह घड़ी के खाली मत छोड़ीं। उर्मिला तय कइली कि साढ़े नौ बजे अब रमेश जी के साथे नीचे बीस मिनट टहलब, आ जवन दिन मन ना होखे, ओह दिन बालकनी में बइठ के कवनो पुरान गीत सुनब, दरवाजा के ओर मुँह कइले बिना। भोर में जुबिली पार्क तक के सैर शुरू भइल, जहाँ पहिले बच्चा के ले के बस छुट्टी के दिन जात रहली। दुपहरिया खातिर कढ़ाई के फ्रेम निकलल। कवनो दिन सब ना होला; ढाँचा के काम बस अतना बा कि दिन पूरा खाली ना लागे।

दोस्ती के धूल झाड़ीं

बच्चा पाले के बरिस में बहुत दोस्ती पीछे छूट जाला, काहे कि केहू के लगे समय ना रहे। अब ओह नंबर के फेर से खोजीं। उर्मिला राँची के कॉलेज वाली सहेली मीनाक्षी के फोन कइली, आ पहिला बेर बात अटकत रहल, बाकिर दोसरा फोन में दुनो आधा घंटा हँसत रहली। मोहल्ला के ओह औरत लोग से भी बात बढ़ावीं जिनकरा से बस नमस्ते होत रहे। कवनो भजन मंडली, पुस्तकालय, सिलाई के क्लास भा मोहल्ला के कवनो सेवा के काम में जुड़ल नया लोग से मिले के सहज रास्ता ह। एह उमिर में दोस्ती धीरे बनेला, बाकिर ई दोस्ती अक्सर जादा ईमानदार होला।

बाईस बरिस बाद फेर से दू आदमी

बच्चा के बरिसन में पति-पत्नी के बातचीत अक्सर बस बच्चा आ घर के काम के बारे में होला: fees, दवाई, बियाह, बजट। बच्चा गइला पर अचानक खाना के मेज पर चुप्पी लागेला। रमेश जी के भी आपन डर बा: दू साल में company से रिटायर होखे के बा, आ ऊ ई बात केहू से ना कहेलें। एह चुप्पी के भरे खातिर छोट आदत शुरू करीं। हफ्ता में एक बेर दुनो मिल के कवनो नया चीज बनाईं, भा कवनो अइसन जगह जाईं जहाँ बच्चा के साथे कबो ना गइल रहीं। बातचीत में एगो नियम राखीं: आधा घंटा बच्चा के नाम ना लिहल जाई। शुरू में अटपटा लागी। बाकिर ओही अटपटा में पता चलेला कि एह बरिसन में दुनो जना कइसन बन गइल बानी। पुरान खटास भी उभर सकेला; ओकरा के शांति से, जरूरत होखे त counsellor के मदद से सुलझाईं।

बच्चा से फोन के डोर

खालीपन में मन करेला कि दिन में तीन बेर फोन करीं: खाना खइलऽ, सुतलऽ, ठंड त ना लागत बा। प्यार के ई रूप बच्चा के कबो-कबो बोझ लागे लागेला, आ ऊ फोन उठावे में देरी करे लागेलें, जवना से माई के मन अउरी घबराला। बेहतर बा कि एतवार के एगो लंबा video call तय होखे, आ बीच में छोट message। फोन पर खाली सवाल मत पूछीं; आपन खबर भी सुनाईं: पार्क में के मिलल, कढ़ाई में का बनल, कवन पुरान सहेली के फोन आइल। जब बच्चा देखेलें कि माई-बाबूजी के आपन जिनगी चलत बा, त ओकरो मन हल्का होला, आ बात अपने आप बढ़ेला।

जब उदासी ठहर जाव

कुछ हफ्ता के उदासी, रोआई आ सूनापन स्वाभाविक बा। बाकिर अगर महीनन बाद भी सबेरे उठे के मन ना करे, खाना-नींद बिगड़ल रहे, हर बात में मन उचटल रहे, भा ई लागे कि अब जीए के कवनो मतलब नइखे, त ई खाली खालीपन ना, कुछ अउरी हो सकेला। तब डॉक्टर से मिलीं आ केहू अपना से बात करीं। Tele-MANAS के नंबर 14416 (भा 1-800-891-4416) पर चौबीसो घंटा मुफ्त बात हो सकेला, हिंदी समेत कई भारतीय भाषा में। अपना भा केहू के जान पर तुरंत खतरा होखे त 112 पर फोन करीं।

बच्चा के पाँख देवे वाला हाथ अब अपना खातिर भी कुछ बुन सकेला।

परिवार के कुंडली, हर आदमी के आपन

ज्योतिष में चौथा भाव घर आ मन के सुख से, पाँचवाँ संतान से, आ चंद्रमा मन से जोड़ल जाला। चलत महादशा-अंतर्दशा आ गोचर से कुछ लोग ई समझे के कोशिश करेला कि एह दौर में मन के कवन हिस्सा जादा जागल बा, नया सीखे के कि आराम के। बाकिर बच्चा के कुंडली से उनकर मन के बात भा उनकर फैसला पढ़ल ठीक ना; हर बड़ बच्चा के कुंडली उनके सहमति से देखल जाव। Astro Ratan, एगो AI वैदिक ज्योतिषी, WhatsApp पर परिवार के हर सदस्य के आपन सटीक कुंडली से अलग प्रोफाइल राख सकेला; तरीका परिवार आ ज्योतिष पर देखीं। सोनम जइसन बेटी, जवन अपना नया घर में ढले के कोशिश में बाड़ी, ओकरा खातिर नया बियाह में अपना के ना खोवे वाला लेख बा।

एतवार के फोन पर नया खबर

तीन महीना बाद एतवार के video call पर अनुराग पूछलस, “माई, पीछे ई बच्चा लोग के ह?” उर्मिला हँसली। मोहल्ला के कामवाली दीदी के दू बच्चा आ बगल के फ्लैट के एगो लइकी अब साँझ के उनका से गणित पढ़े आवेलें। रमेश जी पीछे से बोललें, “तोहार माई अब हमरो से व्यस्त बाड़ी।” साढ़े नौ बजे अबहूँ कबो-कबो कान scooter के आवाज पर लाग जाला। बाकिर अब ऊ घड़ी बस इंतजार के ना, टहले के भी ह।

Key takeaways

  • सून घर के दुख असली बा; “अब त आराम बा” जइसन बात से ओकरा के छोट मत करीं।
  • बरिसन के देखभाल के काम के लिख के गिनीं; ओमें छुपल हुनर नया काम के आधार बन सकेला।
  • जवन घड़ी सबसे जादा खटकेला, ओकरा खातिर पहिले से कवनो नया काम तय करीं।
  • जीवनसाथी के साथे बच्चा के छोड़ के दोसर बात करे के आदत फेर से डालीं।
  • बच्चा से फोन पर पूछताछ के जगह आपन खबर भी सुनाईं, ताकि रिश्ता दुनो ओर से चले।

जे माई भा बाबूजी बच्चा के दूर गइला पर चुपचाप सून घर में बइठल बाड़ें, उनका खातिर दुख के मान आ नया दिन गढ़े के बात।

घर सून भइल बा आ मन पूछत बा कि अब आगे का, त आपन सटीक कुंडली के साथे WhatsApp पर Astro Ratan से एह नया दौर के बारे में आपन सवाल पूछीं।

FAQ

बच्चा के दिन में कई बेर फोन करे के मन करेला, का ई गलत बा?

मन कइल गलत ना ह, ई प्यार आ आदत दुनो ह। बस ई देखीं कि बच्चा के नया जिनगी में ओकरा खातिर जगह बा कि ना। रोज एगो छोट message आ हफ्ता में एगो लंबा बात के नियम दुनो ओर के मन के सहारा देला।

पति के ई सब भावुकता लागेला, उनका से कइसे बात करीं?

कई बेर पुरुष आपन खालीपन काम, TV भा चुप्पी में छुपा लेलें। आरोप के जगह आपन बात कहीं, जइसे “साढ़े नौ बजे हमरा बहुत सून लागेला।” हो सकेला ऊ भी कुछ अइसने कहें जवन बरिसन से ना कहले होखस।

बच्चा के कमरा वइसहीं राखीं कि बदल दीं?

जल्दी के कवनो जरूरत नइखे। कुछ महीना बाद बच्चा से पूछ के ओकर जरूरी चीज एगो अलमारी में राख दीं, आ कमरा में आपन पढ़े, सिलाई भा पूजा के कोना बनाईं। घर में जब बच्चा आवे, ओकरा खातिर जगह रहे, बाकिर बाकी दिन ऊ कमरा राउर नया जिनगी के हिस्सा बने।

पचास के बाद कवनो नया काम भा कमाई शुरू कइल ठीक रही?

बहुत लोग एही उमिर में ट्यूशन, सिलाई, खाना के छोट काम भा कवनो समाज सेवा शुरू करेला, आ ओमें बरिसन के अनुभव काम आवेला। पहिले छोट स्तर पर आजमाईं, जइसे दू-तीन बच्चा के पढ़ावल, फेर बढ़ाईं। पइसा से जादा ई काम दिन के एगो मकसद देला।