दोस्ती टूटल भी दिल टूटल ह—एह दरद के छोट मत मानीं
दोस्ती के टूटन के ना कवनो रस्म होला, ना केहू सांत्वना देला; ओह दुख के मानीं, रिश्ता के ईमानदारी से देखीं, आ नया जुड़ाव धीरे बनाईं, जल्दी में “दोसर दोस्त” मत खोजीं।
Direct answer
हँ, दोस्ती टूटला के दुख सचमुच के दुख ह, आ ओकरा के “दोस्त त आवत-जात रहेला” कह के टाले के जरूरत नइखे। पहिले ओह खालीपन के मानीं। फेर ईमानदारी से देखीं कि दूरी कइसे बनल, दुनो ओर से। चाहीं त एक बेर बिना आरोप के बात करीं, आ जवन जवाब आवे ओकरा के मानीं। नया जुड़ाव छोट-छोट बनाईं, आ दुख लंबा खिंचे त मदद लीं।
रात 9:15, पांडेसरा के एगो कमरा
सूरत के पांडेसरा में कपड़ा मिल के शिफ्ट खतम करके विवेक, 29 बरिस, अपना कमरा में लवटलें। रात के 9:15 बजल, आ हाथ अपने आप फोन पर गइल। ग्यारह साल ले एही बेरा पंकज के फोन आवत रहे, भा विवेक करत रहलें: मऊ के इंटर कॉलेज के दिन से ले के सूरत आ बनारस के नौकरी तक। मिल के बात, घर के बात, IPL के बहस, सब। अब चार महीना से कुछ ना। WhatsApp पर आखिरी message पंकज के रहे: “ठीक बा भाई।” ओकरा ऊपर विवेक के लंबा माफी रहे कि मिल से छुट्टी ना मिलल आ ऊ बियाह में ना आ पइलें। आज पंकज के status पर एगो photo रहे, बनारस के कवनो ढाबा पर नया दोस्त लोग के साथे, सब हँसत। विवेक photo के देर ले देखलें, फेर फोन उलटा के राख दिहलें। कमरा में पंखा के आवाज के छोड़ के कुछ ना रहे।
ना कवनो रस्म, ना कवनो सांत्वना
प्रेम के रिश्ता टूटेला त लोग पूछेला, समझावेला, कबो-कबो बइठ के साथे रोवेला। दोस्ती टूटेला त केहू कुछ ना कहेला। ना केहू एलान करेला कि “खतम”, ना कवनो आखिरी मुलाकात होला। बस फोन के बीच के दूरी बढ़त जाला, आ एक दिन पता चलेला कि चार महीना बीत गइल। जब विवेक अपना रूममेट से कहलें, त जवाब आइल, “अरे, दोस्त त आवत-जात रहेला, भाई।” बात साँच भी बा, आ चुभे वाला भी। ग्यारह साल के रोज के साथी के खोवल, खास कर मरद लोग खातिर, जेकरा लगे मन के बात कहे के जगह पहिले से कम होला, एगो गहिर घाव होला। एकरा के दुख कहे में कवनो शरम नइखे।
दुख के चेहरा
- रोज के ओह घड़ी खालीपन, जब पहिले फोन आवत रहे।
- कवनो खबर सुनला पर पहिला मन ओकरे के बतावे के करे, फेर याद आवे कि अब ना।
- Status आ photo बार-बार देखल, आ हर बेर तनी अउरी चोट।
- खीस, कि ऊ अतना आसानी से आगे बढ़ गइल।
- शक, कि का गलती पूरा हमरे रहे।
ईमानदारी से पीछे देखीं
दुख के बीच एक बेर ठंडा मन से देखल जरूरी बा कि दूरी कइसे बनल, ताकि दोष के बोझ ना गलत आदमी पर जाव, ना पूरा अपना पर। विवेक जब कागज पर लिखलें त तस्वीर एगो झगड़ा से बड़ निकलल। पिछला एक साल में ज्यादातर फोन पर ऊ बस मिल के सुपरवाइजर के शिकायत करत रहलें, पंकज के नया नौकरी के बारे में कम पूछलें। पंकज के बियाह तय भइल त ऊ चाहत रहलें कि विवेक हफ्ता भर पहिले आ जास; विवेक के दू दिन के छुट्टी भी ना मिलल, आ ऊ ई बात बहुत देर से बतवलें। दोसरा ओर, पंकज आपन नाराजगी कबो साफ ना कहलें, बस चुप हो गइलें। बियाह के बाद जिनगी के रफ्तार भी बदलेला। एह में कवनो खलनायक नइखे; दू आदमी बाड़ें, जे अलग-अलग तरह से चूकलें।
एक बेर बात करीं कि ना
हर टूटल दोस्ती के जोड़ल जरूरी ना होला, बाकिर बहुत बेर एक बेर ईमानदार बात दुनो के मन के बोझ हल्का कर देला। अगर मन करे त छोट, बिना आरोप के message लिखीं, जवना में आपन हिस्सा के मान होखे आ जवाब के कवनो माँग ना। विवेक लिखलें: “पंकज, बियाह में ना आ पइनी, ई बात हमरा अबहूँ चुभेला, आ ई भी समझत बानी कि पिछला साल हम बस आपन रोवना रोवत रहनी। तोहरा से बात के बहुत याद आवेला। तू ना चाहऽ त समझ सकेनी। बस ई कहे के रहे।” एकरा बाद गेंद ओकरा पाला में बा। जवाब आवे, देर से आवे, भा ना आवे, तीनो हालत में रउआ जवन कहे के रहे, कह दिहनी।
अलविदा के आपन रस्म
दुनिया रस्म ना देवे त खुदे बनाईं। कुछ लोग एगो चिट्ठी लिखेला जवन कबो भेजल ना जाला, ओह में सब कुछ: शुक्रिया, खीस, याद। कुछ लोग पुरान photo एगो folder में सहेज के रख देला, delete ना, बस सामने से हटा के। कुछ लोग ओह जगह पर जाला जहाँ दोस्ती के सबसे नीमन दिन बीतल रहे। विवेक छठ में गाँव गइलें त इंटर कॉलेज के पीछे वाला ओह पीपल के नीचे बइठलें, जहाँ दुनो पहिला बेर board के result देखले रहलें। कुछ ना भइल। बस मन में एगो अध्याय के आखिरी पन्ना पलटल।
“नया पंकज” मत खोजीं
दुख में मन करेला कि जल्दी से कवनो नया पक्का दोस्त मिल जाव जे ओह खाली जगह के भर दे। बाकिर ग्यारह साल के दोस्ती के जगह तीन हफ्ता में केहू ना ले सके, आ ओह कोशिश में हर नया आदमी से नाउम्मीदी होला। एकरा जगह छोट-छोट जुड़ाव बनाईं। विवेक मिल के कुछ साथी के साथे एतवार के भोर cricket खेले लगलें। गाँव के एगो चचेरा भाई से, जेकरा से बरिसन से बात कम होत रहे, हफ्ता में एक बेर फोन शुरू भइल। रात 9:15 के ऊ घड़ी भी बदलल: अब ओह बेरा ऊ माई के फोन करेलें। कवनो एक आदमी पंकज ना बनल, आ बने के जरूरत भी ना रहे।
कवनो रस्म ना होखे से दुख छोट ना हो जाला; दोस्ती के खोवल भी खोवल ह।
जब दुख के वजन बढ़ जाव
कुछ हफ्ता के उदासी, खीस आ याद स्वाभाविक बा। बाकिर अगर महीनन ले मन उचटल रहे, काम में मन ना लागे, नींद-भूख बिगड़ जाव, सबसे कटे के मन करे, भा ई लागे कि कवनो केहू अपना ना ह आ जीए के मतलब नइखे, त ई बोझ अकेले मत उठाईं। कवनो भरोसेमंद आदमी से बात करीं, भले पहिला बेर अटपटा लागे। Tele-MANAS के नंबर 14416 (भा 1-800-891-4416) पर चौबीसो घंटा मुफ्त बात हो सकेला, हिंदी समेत कई भारतीय भाषा में। अपना भा केहू के जान पर तुरंत खतरा होखे त 112 पर फोन करीं। मदद माँगल मरदानगी के कमी ना, हिम्मत ह।
कुंडली में दोस्ती के जगह
परंपरा में ग्यारहवाँ भाव दोस्त, साथी आ समाज के जुड़ाव से, आ चंद्रमा मन से जोड़ल जाला। चलत दशा आ गोचर से कुछ लोग ई समझे के कोशिश करेला कि एह दौर में रिश्ता के कवन हिस्सा जादा हिलत बा। बाकिर कवनो ग्रह के दोष दे के दोस्ती के टूटन के समझल ना जा सके, आ पंकज के मन ओकर कुंडली से ना पढ़ल जा सके; केहू अउरी के कुंडली बस ओकरे सहमति से। Astro Ratan, एगो AI वैदिक ज्योतिषी, WhatsApp पर राउर आपन सटीक कुंडली से एह दौर के बारे में राउर सवाल पर बात कर सकेला; तरीका परिवार आ रिश्ता के ज्योतिष पर बा। टूटल रिश्ता के बाद फेर से भरोसा जोड़े पर तलाक के बाद दोसर बियाह वाला लेख में भी कुछ काम के बात बा, भले ओकर रिश्ता अलग बा।
चालीस सेकंड के एगो voice note
Message भेजला के दू दिन बाद, रात 9:40 पर, पंकज के चालीस सेकंड के voice note आइल। आवाज तनी थाकल रहे: “भाई, हमरो से गलती भइल। नाराज रहनी, बाकिर कहनी ना। नया नौकरी आ बियाह में सब उलझ गइल। कबो बनारस आवऽ त मिलल जाई।” रोज के 9:15 वाला फोन लवट के ना आइल, आ शायद अब ना आई। बाकिर ओह रात विवेक के छाती के गाँठ तनी ढील भइल। दोस्ती के पुरान रूप चल गइल रहे; ओकर इज्जत बच गइल।
Key takeaways
- दोस्ती के टूटन के दुख असली बा; कवनो रस्म ना होखे से ऊ छोट ना हो जाला।
- दूरी अक्सर एगो झगड़ा से ना, जिनगी के बदलत दौर आ अनकहल शिकायत से बनेला; दुनो ओर के हिस्सा देखीं।
- एक बेर, बिना आरोप के, सीधा बात कइल जा सकेला; जवाब पर राउर काबू नइखे।
- पुरान दोस्त के जगह तुरंत “नया पक्का दोस्त” खोजे के जगह छोट-छोट जुड़ाव बनाईं।
- जवन घड़ी सबसे जादा खटकेला, ओकरा खातिर कवनो नया काम भा आदमी तय करीं।
जे दोस्त चुपचाप कवनो पुरान दोस्ती के खोवे के दुख ढोवत बा आ केहू से कहत नइखे, ओकरा खातिर: ई दुख असली बा, आ एकरा से निकले के रास्ता भी बा।
दोस्ती के टूटन के बाद मन भारी बा, त WhatsApp पर Astro Ratan से आपन सटीक कुंडली के साथे एह दौर के बारे में बात करीं; दुख के रास्ता रउआ खुदे तय करब।
